
फोटो: पत्रिका नीरज गौतम
Patrika Expose: कोटा शहर की सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए पुलिस और प्रशासन की ओर से संयुक्त अभियान चला रखा है और पिछले तीन-चार दिन से रोजाना सड़कों के किनारे ठेले और बॉडियां हटाने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद ठेला माफियाओं को प्रशासन का डर खत्म हो गया है।
यह शहर में जगह-जगह पैसे लेकर सड़कों के किनारे और फुटपाथ पर ठेले खड़े करवाते हैं और बॉडियां लगवाते हैं। इसकी ऐवज में रकम वसूल करते हैं। ठेला माफिया कोचिंग और हॉस्टल बाहुल्य क्षेत्र में सड़कों पर गोला बनाकर अपना कब्जा दिखकर ठेला खड़ा करने की ऐवज में महीने के 5000 रुपए तक की राशि वसूल करते हैं।
शहर में झालावाड़ रोड पर फल विक्रेताओं ने 10-12 फीट सड़क पर कब्जा कर रखा है। ईएसआई अस्पताल के आसपास 50 से अधिक ठेले लगते हैं। इस कारण आए दिन यातायात जाम होता है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दिन में कई बार इस रोड से गुजरते हैं लेकिन हटाने की जहमत नहीं उठाते हैं। शहर में वीआईपी मूवमेंट होने पर ठेले गायब करवा दिए जाते हैं। डीसीएम रोड पर धानमंड़ी से लेकर जिला उद्योग केन्द्र तक बड़ी संख्या में ठेले लग रहे हैं। तीन दिन पहले प्रशासन ने हटाया था, लेकिन फिर आ जमे हैं।
कोचिंग और हॉस्टल बाहुल्य क्षेत्र राजीव गांधी नगर क्षेत्र जब ठेला लगाने वालों से पूछा गया तो पहले तो सबने इनकार किया लेकिन पास खड़े युवक ने कहा ‘अंदर जाकर भाई साहब से बात करो’। दो युवक एक चाय की थड़ी पर बैठे थे उन्होंने पूछा किसका ठेला लगाना है, उसके हिसाब से जगह मिलेगी।
रिपोर्टर बोला फास्टफूड का ठेला लगाएंगे तो वह बोला कि दिन में फ्रूट का ठेला लगता है। वहां शाम पांच बजे से लगा लेना और रोजाना के 200 रुपए देने होंगे। पुलिस वाले आए तो नाश्ता करवा देना और 100-200 रुपए दे देना। तलवंडी रोड पर ठेले वालों ने बताया कि महीने-दो महीने में निगम के कर्मचारी आते हैं और रसीद के नाम पर पैसे लेकर चले जाते है, लेकिन कोई रसीद भी नहीं देते हैं।
इन्द्रप्रस्थ औद्योगिक क्षेत्र में रोड नम्बर एक पर डकनिया स्टेशन रोड पर पुलिस और केडीए के भारी जाप्ते ने इस रूट के समूचे अतिक्रमण पर बुलडोजर चला दिया था लेकिन दो दिन बार फिर ठेले वाले आ जमे हैं। जिसमें अंडे, फास्टफूड, फ्रूट आदि के ठेले लग गए हैं। इलेक्ट्रोनिक्स कॉम्प्लैक्स में एक दर्जन से अधिक ठेले और बॉडियां लगी हुई है।
केशवपुरा रोड स्थित आल्हा-उदल पार्क के पास ठेला लगाने वालों ने बताया कि पहले 100 रुपए रोज किराया देना पड़ता था अब यह बढ़कर 150 रुपए तक पहुंच गया है। जब पूछा गया कि यह पैसा कौन लेता है तो दुकानदारों ने नाम बताने से इनकार कर दिया। एक ने कहा ‘नाम बताकर दुकान हटवानी है क्या’ यानी खुलासा करने पर कार्रवाई का डर है।
बालिता रोड पर लगने वाली सब्जी मंडी में भी यही हाल है। यहां दुकान के आगे सड़क पर बैठने या फल-सब्जी का ठेला लगाने वालों से 100 से 200 रुपए रोज तक वसूला जा रहा है। एक सब्जी बेचने वाली महिला ने बताया कि वह सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक सड़क किनारे बैठने के लिए दुकानदार को हर महीने 1500 रुपए किराया देती है।
Updated on:
13 Nov 2025 12:46 pm
Published on:
13 Nov 2025 12:45 pm
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
