
किसान शिवप्रसाद मालव (फोटो-पत्रिका)
झालावाड़। खानपुर उपखंड मुख्यालय से सटे देवपुरा-नयागांव निवासी किसान शिवप्रसाद मालव ने आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती में नई मिसाल पेश की है। पारंपरिक फसलों को छोड़कर मीठे खरबूजे और पीले तरबूज की खेती कर वे अब हर साल लाखों रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं।
किसान ने बताया कि करीब चार वर्ष पूर्व गांव निवासी उद्यान विभाग में वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक दानमल मालव की सलाह पर उन्हें इस खेती का विचार आया। इसके बाद उन्होंने मध्य प्रदेश के सोयत क्षेत्र से बीज मंगवाकर प्रयोग के तौर पर खरबूजे की खेती शुरू की।
उन्होंने बताया कि पहले ही साल बेहतर मुनाफा मिलने पर उन्होंने इसे नियमित रूप से अपनाया और अब लगातार तीन साल से तीन बीघा में खरबूजे की खेती कर रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने पीले रंग के तरबूज की खेती भी शुरू की है, जो बाहर से पीला और अंदर से लाल, मीठा व रसदार होता है। इसकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि दिसंबर में बुवाई के बाद अप्रेल के पहले सप्ताह से फल पकना और तुड़ाई शुरू हो जाती है।
किसान शिवप्रसाद मालव ने बताया कि खरबूजे का बीज करीब 6500 रुपए प्रति 100 ग्राम तथा तरबूज का बीज 7800 रुपए प्रति 100 ग्राम मिलता है। 100 ग्राम बीज एक बीघा खेत के लिए पर्याप्त होता है। इसके अलावा फसल को कीट से बचाने के लिए आवश्यक कीटनाशकों का भी नियमित उपयोग करना पड़ता है।
किसान ने बताया कि बूंद-बूंद सिंचाई योजना में उन्हें 70 प्रतिशत तक और मल्चिंग में 50 प्रतिशत अनुदान मिला था। हालांकि, यह अनुदान एक बार मिलने के बाद अगले तीन वर्षों तक नहीं मिलता, इसके बाद मल्चिंग और लो टनल जैसी व्यवस्थाओं का खर्च किसान को स्वयं वहन करना पड़ता है।
उत्पादन के बाद खरबूजे और तरबूज को स्थानीय बाजार के साथ बारां मंडी में बेचा जाता है। अधिक उत्पादन होने पर इन्हें जयपुर तक भेजा जाता है। वर्तमान में खरबूजे का भाव करीब 25 रुपए प्रति किलो और तरबूज का 20 रुपए प्रति किलो या उससे अधिक मिल रहा है।
लागत और मुनाफे के बारे में किसान ने बताया कि पहले साल ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और लो टनल व्यवस्था पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च हुए थे, जबकि लगभग तीन लाख रुपए की फसल बेची गई। दूसरे वर्ष संसाधनों के पुनः उपयोग से लागत घटकर करीब 50 हजार रुपए रह गई और उत्पादन फिर करीब तीन लाख रुपए का रहा।
तीसरे वर्ष भी उन्हें इसी प्रकार अच्छा लाभ मिल रहा है। किसान ने बताया कि उनके खरबूजों व तरबूज की मिठास और गुणवत्ता के कारण अब बड़ी संख्या में लोग सीधे खेत पर पहुंचकर खरीदारी करने लगे हैं।
खरबूजा, तरबूज सहित अन्य सब्जी फसलों की खेती पर विभाग द्वारा अधिकतम पांच हैक्टेयर तक बूंद-बूंद सिंचाई योजना में सामान्य वर्ग के किसान को 70 प्रतिशत तथा मल्चिंग व लो टनल के लिए 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है। मल्चिंग और लो टनल पर सब्सिडी तीन वर्ष में पुनः मिल सकती है, जबकि ड्रिप सिंचाई पर अनुदान सात वर्ष में एक बार ही दिया जाता है।
यदि किसान पपीता, संतरा, मौसमी जैसे फलदार पौधों की खेती करना चाहे तो 50 हजार रुपए तक का अनुदान मिलता है, जिसमें पहले वर्ष 30 हजार और दूसरे वर्ष 20 हजार रुपए दिए जाते हैं। -दानमल मालव, वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक, उद्यान विभाग
Updated on:
09 Apr 2026 11:33 am
Published on:
08 Apr 2026 06:12 pm
बड़ी खबरें
View Allझालावाड़
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
