
सिंबोलिक इन्फोग्राफिक्स
जिस शहर ने दुनिया को होली के रंगों की सौगात दी, वही शहर रानी झांसी के समय से इस दिन रंग लगाना छोड़ गया। आपको जानकारी देने के लिए हमें 1857 की क्रांति के इतिहास में जाना होगा। जहां अंग्रेजों ने होली के दिन झांसी सल्तनत में एक तुगलकी फरमान भेजा था। इसमें लक्ष्मीबाई के बेटे दामोदर राव को उनका उत्तराधिकारी नहीं माना गया था।
अंग्रजों ने भेजा था तुगलकी फरमान
दरअसल, 21 नवंबर, 1853 को झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद वहां के राज की कमान रानी लक्ष्मीबाई के हाथों में आ गई थी। गंगाधर राव ने उनकी मृत्यु से पहले ही एक बालक यानी दामोदर राव को गोद लेकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। अंग्रेजों ने इस सत्ता के हस्तांतरण को मानने से इनकार कर दिया। जिस दिन झांसी में यह फरमान जारी किया गया, वह होली का ही दिन था।
ब्रिटिश सरकार के अधीन कर दिया था झांसी
महारानी लक्ष्मीबाई और उनकी झांसी किताब के मुताबिक, डलहौजी ने एक पत्र लिखा था- भारत सरकार की 7 मार्च 1854 की आज्ञा के अनुसार झांसी का राज्य ब्रिटिश इलाके में मिलाया जाता है। इस इश्तेहार के जरिए सब लोगों को सूचना दी जाती है कि झांसी प्रदेश का शासन मेजर एलियस के अधीन किया जाता है। इस प्रदेश की प्रजा अपने को ब्रिटिश सरकार के अधीन समझे और मेजर एलियस को 'कर' दिया करें सुख शांति और संतोष के साथ जीवन निर्वाह करें।
होली वाले दिन घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना
झांसी गैजेटियर में लिखा है कि झांसी में होली के जश्न की तैयारी शुरू हो चुकी थी। इसी दिन अंग्रेजी हुकूमत का तुगलकी फरमान झांसी किले के अंदर सुनाया गया। फरमान सुनते ही लोग उदास हो गए और शोक में डूब गए। उस दिन झांसी में होली नहीं खेली गई और महारानी लक्ष्मीबाई को अपना किला छोड़कर महल में जाना पड़ गया।
रानी झांसी के सम्मान में आज भी नहीं खेलते होली
झांसी के नागरिक आज भी महारानी लक्ष्मीबाई का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना कभी उनके पूर्वज करते थे। जो लोग मूल रूप से इस जनपद के निवासी हैं वे आज भी होली नहीं खेलते हैं। सिर्फ बाहर से आए लोग या यहां नौकरी कर रहे कर्मचारी ही होली वाले दिन होली खेलते हैं। झांसी वाले भाई दूज के दिन एक-दूसरे को रंग लगाकर होली खेलते हैं।
Updated on:
08 Mar 2023 11:46 am
Published on:
08 Mar 2023 10:45 am
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