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क्या मस्जिदों में हड्‌डी फेंक सकते हैं? अखिलेश यादव पर भड़कीं मंत्री बेबी रानी मौर्य

वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी विवादित हो गई। 14 मुस्लिम युवकों ने बिरयानी खाई और हड्डियां नदी में फेंकी।

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झांसी

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Anuj Singh

Mar 22, 2026

अखिलेश यादव बनाम बेबी रानी मौर्य

अखिलेश यादव बनाम बेबी रानी मौर्य

Varanasi Iftar Party Controversy: हाल ही में वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी का मामला बहुत विवाद में आया। 14 मुस्लिम युवकों ने नाव पर इफ्तार किया, जिसमें चिकन बिरयानी खाई गई और कथित तौर पर हड्डियां नदी में फेंकी गईं। वीडियो वायरल होने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। आरोप लगा कि इससे हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंची।

अखिलेश यादव का बयान

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी क्यों नहीं कर सकते? उन्होंने पुलिस और प्रशासन पर तंज कसा। अखिलेश ने कहा कि अगर पुलिस की "हथेली गरम" की जाती (यानी रिश्वत दी जाती), तो शायद कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि क्रूज पर महंगी शराब परोसने पर कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन इफ्तार पर सख्ती की जा रही है। अखिलेश का कहना था कि यह सब लोगों में दूरी पैदा करने और दोहरे मापदंड अपनाने की कोशिश है।

मंत्री बेबी रानी मौर्य की प्रतिक्रिया

झांसी में भाजपा की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने अखिलेश यादव के बयान पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गंगा हमारी मां हैं। गंगा मां पर जाकर रोजा इफ्तार पार्टी की, लेकिन मुर्गे खा-खाकर टांगें (हड्डियां) फेंकने की इजाजत किसने दे दी? बेबी रानी ने पूछा कि क्या इनकी मस्जिदों में जाकर जानवरों की हड्डियां फेंक सकते हैं? अगर ऐसा किया तो दंगे हो जाएंगे।
उन्होंने अखिलेश पर आरोप लगाया कि उन्हें हिंदुओं की आस्था की कोई चिंता नहीं है। वे सिर्फ तुष्टिकरण और वोटबैंक की राजनीति कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि गंगा हिंदुओं की आस्था का प्रतीक है, इसलिए नदी में कचरा या हड्डियां फेंकना गलत है।

विवाद का पूरा मामला

यह घटना मार्च 2026 की है, जब रामनवमी और नवरात्रि के आसपास हुआ। वीडियो सोशल मीडिया पर फैला तो बीजेपी युवा मोर्चा ने शिकायत की। पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और नदी को गंदा करने के आरोप में केस दर्ज किया। युवकों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में कुछ को जमानत मिल गई। अखिलेश के बयान से सपा-बीजेपी के बीच नई बहस शुरू हो गई। बीजेपी इसे हिंदू आस्था पर हमला बता रही है, जबकि सपा इसे भेदभाव कह रही है।