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किसानों की आय दोगुनी करने के फॉर्मुले पर राजस्थान के आबूसर में हो रहा बड़ा प्रयोग

सेंटर की अनुसंधान अधिकारी गीता गैणा ने बताया कि अजवायन, जीरा, मैथी, धनिया, सौंफ और दिल की प्रायोगिक खेती की गई है। यहां की जलवायु, मिट्टी, पानी के अनुकूल मसाला फसलों की खेती पर अनुसंधान किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहा तो अगले सत्र में किसानों को इसकी खेती की सलाह दी जाएगी।

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किसानों की आय दोगुनी करने के फॉर्मुले पर राजस्थान के आबूसर में हो रहा बड़ा प्रयोग

किसानों की आय दोगुनी करने के फॉर्मुले पर राजस्थान के आबूसर में हो रहा बड़ा प्रयोग

राजेश शर्मा
झुंझुनूं. किसानों की आय दोगुनी करने के फॉर्मुले पर जिले के आबूसर गांव में बड़ा प्रयोग किया जा रहा है। यहां अधिकारी छह प्रकार की मसाला फसलों पर अनुसंधान कर रहे हैं। यदि प्रयोग सफल रहा तो चार जिलों में इसकी बड़े स्तर पर खेती की जाएगी।
कृषि विभाग के एडप्टिव ट्रायल सेंटर (एटीसी) आबूसर में कैफेटरिया बनाया गया है। यहां राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी (अजमेर) से छह प्रकार के मसाला बीज की प्रायोगिक खेती की गई है। सेंटर की अनुसंधान अधिकारी गीता गैणा ने बताया कि अजवायन, जीरा, मैथी, धनिया, सौंफ और दिल की प्रायोगिक खेती की गई है। यहां की जलवायु, मिट्टी, पानी के अनुकूल मसाला फसलों की खेती पर अनुसंधान किया जा रहा है। प्रयोग सफल रहा तो अगले सत्र में किसानों को इसकी खेती की सलाह दी जाएगी। साथ ही छह मसाला फसलों की श्रेष्ठ किस्म, बीजोपचार, उगाने के तरीके, कीट-व्याधियों से बचाव के तरीके भी बताए जाएंगे। कैफेटरिया के अनुसंधान अधिकारी सुनील महला ने बताया कि राजस्थान को कृषि जलवायु क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग भागों में बांट रखा है। एटीसी आबूसर के अधीन नागौर, चूरू, झुंझुनूं व सीकर जिले आते हैं। चारों जिलों में कोई भी फसल व बीज की किस्म उगाने से पहले यहां उसका परीक्षण किया जाता है। इसके बाद ही किसानों को उसे उगाने की सलाह दी जाती है। यहां प्रगतिशाील किसानों, कृषि विज्ञान के विद्यार्थियों और कृषि पर्यवेक्षकों को नियमित बुलाकार मसाला खेती की जानकारी दी जा रही है। अभी तक छह फसलों पर अनुसंधान किया जा रहा है। प्रारंभिक रिपोर्ट सही दिशा में आ रही है।

#atc aabusar
पिछली बार जीरो बजट पर अनुसंधान
एटीसी आबूसर में एक साल पहले जीरो बजट खेती पर अनुसंधान किया गया था। इसके तहत यहां बिना खाद, बिना रसायन, बिना दवा के मूंग की खेती की गई थी। इसकी रिपोर्ट भी सरकार को भेज दी गई है।

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किसानों की आय दो गुनी हो, इसके लिए किसान परम्परागत खेती की जगह तिलहन व मसालों की खेती करे। इस फॉर्मुले पर काम करते हुए हमने अजमेर से छह प्रकार के मसाला बीज मंगवाए हैं। उन पर हमारे रिसर्च ऑफिसर नियमित अनुसंधान कर रहे हैं। पाळे के अलावा अभी तक कोई समस्या नहीं आई। यहां प्रयोग सफल होने पर रिपोर्ट कृषि विवि व कृषि आयुक्त को भेजेंगे।
-उत्तम सिंह सिलाचय, उप निदेशक, एटीसी आबूसर