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झुंझुनूं में सुनाई देने लगी नन्ही परियों की किलकारियां

बेटी बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जाने वाले जागरूकता अभियानों का जिले में अब असर दिखाई देने लग गया है।

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झुंझुनूं। बेटी बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जाने वाले जागरूकता अभियानों का जिले में अब असर दिखाई देने लग गया है। किसी समय कन्या भू्रण हत्या मामले में अग्रणी रहने वाले जिले में अब नन्ही परियों की किलकारियां घरों में सुनाई देने लग गई हैं। चिकित्सा विभाग की लगातार कार्रवाईयों के चलते काफी हद तक भू्रण जांच के सौदागरों पर लगाम कसी है।वर्ष 2011 की बात करें तो जिले में एक हजार बालकों के मुकाबले में बालिकाओं की संख्या 837 थी।

चिकित्सा विभाग की ओर से भू्रण जांच कार्य करने वालों की सूचना देने वालों को मुखबिर योजना के तहत प्रोत्साहन राशि को बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दिया गया। विभाग की माने तो अब तक 96 डिकॉय ऑपरेशन कर भू्रण जांच कार्य में लगे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार किए जाने वाले डिकॉय ऑपरेशनों का नतीजा निकला कि जिले में वर्ष 2016 में 949 व 2017 अप्रेल से लेकर अब तक जिले में जन्म लेने वाली बालिकाओं की संख्या 952 पर पहुंच गई हैं।

क्या है डिकाय ऑपरेशन
स्वास्थ्य विभाग की पीसीपीएनडीटी सेल की ओर से किसी व्यक्ति के भू्रण जांच करवाने की सूचना का सत्यापन करवाया जाता है। इसके बाद में किसी गर्भवती को भू्रण जांच कराने के लिए तैयार करते है। बाद में दलाल से सम्पर्क साधा जाता है। सबकु छ तय होने के बाद में ग्राहक के तौर पर गर्भवती व सहायक महिला को दलाल के बताए हुए स्थान पर भेजा जाता है।जांच करवाने के बाद महिलाओं का इशारा पाकर मौजूद टीम के सदस्य गिरफ्तार करते हैं।पूरे ऑपरेशन के दौरान टीम व पुलिस के सदस्य गर्भवती व सहायक महिला पर निगरानी रखते हैं। ऑपरेशन के दौरान महिलाएं व टीम के सदस्य मोबाइल पर जीपीएस से जुड़े रहते हैं।

जिले में बालिका जन्म की स्थिति
वर्ष----------------बालिका
2014-------------893
2015-------------903
2016-------------949
2017-------------952

इनका कहना है
विभाग की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान के अलावा लगातार किए जा रहे डिकॉय ऑपरेशनों से सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे है। भू्रण जांच की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है।
दिनेश कुमार, जिला समन्वयक पीसीपीएनडीटी सैल झुंझुनूं।