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19 साल की उम्र में पिता ने किडनी देकर बचाई जान, अब देश के लिए पदक जीतने का सपना

मैं जब 19 साल का था, तब मेरी किडनी खराब हो गई। पिता ने खुद की किडनी देकर मेरी जान बचाई। अब मेरा सपना देश में फिट रहने का संदेश देना और देश के लिए खेलों में पदक जीतना है।

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नवलगढ़ पत्रिका. मैं जब 19 साल का था, तब मेरी किडनी खराब हो गई। पिता ने खुद की किडनी देकर मेरी जान बचाई। अब मेरा सपना देश में फिट रहने का संदेश देना और देश के लिए खेलों में पदक जीतना है। यह कहना है जाखल गांव निवासी भवानी सिंह शेखावत का। शेखावत का 13वें वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स 2023 में चयन हुआ है। यह गेम्स ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में 15 से 22 अप्रेल तक होंगे।

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शेखावत वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर नवलगढ़ के झाझड गांव में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। वह भारत की तरफ से लॉन बाल व पेंटांक सहित खेलों की 4 श्रेणियों में भाग लेंगे। उन्होंने बताया, वर्ष 1978 से लगातार इन खेलों का आयोजन अन्तर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सहयोग से विश्व के अनेक शहरों में होता रहा है। इसमें वे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनका अंग प्रत्यारोपण हो चुका है। इस बार भारतीय दल में कुल 30 खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया जाएंगे। जिनमें राजस्थान के 5 खिलाड़ी हैं। शेखावत ने दिल्ली, रांची और कोलकाता में ट्रेनिंग ली है। शेखावत वर्ष 2018 में मुंबई में हुए नेशनल लॉन बाल में रजत पदक जीत चुके। अब 38 वर्ष की उम्र में देश के लिए पदक जीतने का सपना है।

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2004 में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
जाखल सीएचसी में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत भवानी सिंह शेखावत का 19 वर्ष की उम्र में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। भवानी सिंह के पैर के इंफेक्शन के इलाज के लिए लगाए गए इंजेक्शन के कारण दोनों गुर्दे खराब हो गए थे। उनके पिता घनश्याम सिंह ने वर्ष 2004 में अपना एक गुर्दा दान कर भवानी सिंह का जीवन बचाया।

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