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सीए में देश में टॉपर रही राधिका ने बताए सफलता के टिप्स

पिता चौथमल व मां आशा ने बताया कि आज वे शादी में आए हैं। बेटी ने जो नाम कमाया है उसे दोनों पूरे जीवन भर नहीं भूल सकते। शादी के बीच बेटी के परिणाम ने आंखों में खुशियों के आंसू ला दिए।

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सीए में देश में टॉपर रही राधिका ने बताए सफलता के टिप्स

सीए में देश में टॉपर रही राधिका ने बताए सफलता के टिप्स

#ca radhika beriwala
झुंझुनूं. राजस्थान के मुकुंदगढ़ कस्बे की रहने वाली राधिका बेरीवाला ने घोषित सीए परीक्षा में पूरे भारत में पहली रैंक हांसिल की है। बेटी के टॉपर आने पर घर-परिवार में खुशियां मनाई गई। यह परिवार कई वर्षों से सूरत रहता है। पिता चौथमल बेरीवाला कपड़े के व्यवसायी हैं, जबकि मां आशा गृहिणी है। परिवार में अब तक सात सीए बन चुके। उसकी पूरी पढ़ाई सूरत से हुई है। दसवीं में राधिका के दस सीजीपीए तथा बारहवीं में ९६.४० फीसदी अंक आए थे। उसने सीबीएसई अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की। चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया की ओर से घोषित परिणाम के मुताबिक राधिका बेरीवाला ने कुल 800 में से 640 अंक अर्जित किए हैं। 80 प्रतिशत अंकों के साथ वह यह परीक्षा टॉप करने में सफल रही। छोटे भाई प्रियांशु ने भी गुरुवार को ही सीए फाउंडेशन प्रथम लेवल परीक्षा उत्तीर्ण की है। पिता चौथमल व मां आशा ने बताया कि आज वे शादी में आए हैं। बेटी ने जो नाम कमाया है उसे दोनों पूरे जीवन भर नहीं भूल सकते। शादी के बीच बेटी के परिणाम ने आंखों में खुशियों के आंसू ला दिए। परिणाम आने के दिन संयोग से राधिका शादी समारोह में झुंझुनूं आई है। पत्रिका ने राधिका से बात की। पेश है प्रमुख अंश।

#ca radhika beriwala
राधिका के पिता चौथमल खुद भी राजस्थान बोर्ड के टॉपर रह चुके हैं। वे 10वीं में स्टेट मेरिट में सातवें तथा 12वीं कॉमर्स में स्टेट मेरिट में चौथे स्थान पर थे। उनका सपना था कि वे आईएएस बने। लेकिन वे बन नहीं पाए। इसके बाद आरएएस—2006 परीक्षा दी। पास हो गए। लेकिन उन्हें मनमाफिक रैंक नहीं मिली। इसलिए उन्होंने नौकरी एक साल करने के बाद छोड़ दी। सूरत में खुद का बिजनेस करने लग गए।

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प्रेसिडेंट ने खुद दी बधाई:
जैसे ही सीए फाइनल का परिणाम जारी हुआ वैसे ही राधिका को उसके देशभर में पहला नंबर आने की जानकारी खुद आईसीएआई के प्रेसिडेंट निहार जंबूसरिया ने कॉल कर जानकारी दी। साथ में बधाई भी दी।

सवाल: सीए ही क्यों चुना?
जवाब: परिवार में मेरे से पहले सात सीए हैं। परिवार में सभी लोग खुद का कारोबार करते हैं। बारहवीं के बाद वाणिज्य विषय लिया। इसके बाद तैयारी करती रही। परिवार की आठवीं सीए बन गई।

सवाल: कितनी देर पढ़ाई की?
जवाब: टॉपर आने के लिए आपको नियमित कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। एक दिन या एक साल की पढ़ाई से कोई टॉपर नहीं आ सकता। कोचिंग करने के बाद मैंने नियमित सात से आठ घंटे पढाई की।

सवाल: बेरवाला का मतलब क्या होता है?
जवाब: हमारे पुरखे राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ के बेरी गांव के रहने वाले थे। यहां से वे पहले मुकुंदगढ़ आए। इसके बाद व्यवसाय बढ़ाने के लिए सूरत चले गए, लेकिन अपने गांव का नाम हमेशा अपने साथ रखा। गांव की माटी को नहीं भूले। इसलिए नाम के बाद गांव का नाम बेरीवाला लगाते हैं।

सवाल: पढ़ाई करने वाले युवाओं को क्या संदेश देंगी? वे जल्द हताश होने लगे हैं?
जवाब: पढाई नियमित करें। केवल एक विषय महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि हर विषय महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे खुद पर आत्मविश्वास रखें। मेहनत करने वालों के लिए कोई लक्ष्य मुश्किल नहीं होता। हार नहीं मानें, सफलता जरूर मिलेगी।

सवाल: आगे क्या लक्ष्य है?
जवाब: पहला लक्ष्य एमबीए करना है। यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा तो अगले लक्ष्य के बारे में सोचूंगी। खुद की कम्पनी खोलने का विचार है।