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आंखों की मोहताज नहीं, रोशनी गई तो सुनकर की पढ़ाई,आरएएस मुख्य परीक्षा की उत्तीर्ण

सब कुछ सही चल रहा था। दुनिया भी खूबसूरत थी। चारों तरफ खुशियों के रंग छाए हुए थे। फिर आया वर्ष 2011, उसने जीवन ही बदल दिया। खुशियां निराशा में बदल गई। जिधर देखो उधर ही घोर अंधेरा।

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chirawa town Pratibha Agarwal RAS Main Exam Passed

चिड़ावा( झुंझुनूं)। सब कुछ सही चल रहा था। दुनिया भी खूबसूरत थी। चारों तरफ खुशियों के रंग छाए हुए थे। फिर आया वर्ष 2011, उसने जीवन ही बदल दिया। खुशियां निराशा में बदल गई। जिधर देखो उधर ही घोर अंधेरा। कुछ दिन परेशान रही। लेकिन फिर सोचा, जीना तो पड़ेगा। फिर क्यों निराशा के साथ जीया जाए। इसी सोच के साथ फिर जिंदगी में चमक लाई। परिवार, रिश्तेदारों, सहपाठियों व शिक्षकों ने हर कदम पर साथ दिया। इस गम को भुला दिया और जुट गई नए सवेरे की तलाश में...।

झुंझुनूं जिले के चिड़ावा कस्बे में स्थित परमहंस कॉलोनी निवासी प्रतिभा अग्रवाल जीवन के अंधेरे में सफलता की रोशनी ढूंढने की यह कहानी सुनाते हुए कुछ भावुक हो जाती है। प्रतिभा ने आंखों की रोशनी गंवाने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। ऑडियो सुनकर तैयारी करती रही। नतीजा, प्रतिभा ने हाल ही में जारी आरएएस मुख्य परीक्षा के परिणाम में सफलता हासिल की।

29 वर्षीय प्रतिभा की जिंदगी 2011 तक सामान्य थी। प्रतिभा एमए प्रीवियस की परीक्षा दे रही थी। उसी दौरान अचानक उसकी आंखों की रोशनी चली गई। वह और उनके परिजन हताश हो गए। उन्होंने आंखों के इलाज के लिए दिल्ली एम्स तथा अमरीका तक संपर्क साधा। मगर हर जगह निराशा हाथ लगी। डॉक्टर्स ने बताया कि प्रतिभा की आंखों की रोशनी रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा बीमारी के कारण चली गई है। जिसका इलाज संभव नहीं है। सभी को धक्का लगा, मगर प्रतिभा ने हिम्मत नहीं हारी। पढ़ाई जारी रखी। 2017 में बीएड में प्रवेश लिया। जो पिछले साल पूरी हो गई।

प्रतिदिन 18 से 20 घंटे की तैयारी
पिता सुरेंद्र अग्रवाल व्यापारी और माता सरला देवी गृहिणी हैं। उनके परिवार के सदस्य महेश ने बताया कि प्रतिभा ने प्रतिदिन 18 से 20 घंटे तक अध्ययन किया। जिसके लिए सहेली श्रद्धा पंसारी ने भी खूब सहयोग दिया। चिड़ावा के राजेश शर्मा के सहयोग से नोट्स का ऑडियो बनाकर दिया। आरएएस परीक्षा में लिखने के लिए सहयोगी दिया गया। प्रतिभा से वह सवाल पूछता, वह बोलकर उसका जवाब देतीं। प्रतिभा पढ़ाई में होशियार रही। दसवीं में 70, 12वीं में 76 प्रतिशत अंक हासिल किए। बीए प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की।

रिकॉर्ड कर सुनाते
परीक्षा के लिए परिजनों, सहेलियों ने सपोर्ट किया। तैयारी के लिए किताबों के कंटेंट को मोबाइल में रिकॉर्ड करके दिया। यूट्यूब पर भी एग्जाम से जुड़ी जानकारी सर्च करके दी। वह रिकॉर्डिंग को दिनभर सुनती रही। प्रतिभा 90 प्रतिशत रोशनी खो चुकी है। उसे महज परछाई दिखती है।


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