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चुनावी किस्से…पहले प्रचार के लिए पैदल जाते थे गांव-ढाणियों में, जुबान के होते थे पक्के

election stories : पहले लोग बिना स्वार्थ के प्रचार करते थे। आज के समय में उम्मीदवारों के साथ वाहनों का काफिला नजर आता है। लेकिन हमारे समय में वाहन नहीं होते थे। लोग पैदल टोली बनाकर गांव गांव ढाणियों में प्रचार करने जाते थे। रात्रि में विश्राम भी गांवों में ही किया करते थे। लोग बहुत सम्मान करते थे, बिना खाना खाए आने नहीं देते थे। आज के समय में कोई किसी के घर दस मिनट से ज्यादा रुकना नहीं चाहता और न ही कोई रोकना चाहता है।

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चुनावी किस्से...पहले प्रचार के लिए पैदल जाते थे गांव-ढाणियों में, जुबान के होते थे पक्के

चुनावी किस्से...पहले प्रचार के लिए पैदल जाते थे गांव-ढाणियों में, जुबान के होते थे पक्के

झुंझुनूं. election stories : आज की राजनीति स्वार्थ की हो गई हैं। बिना स्वार्थ के कोई काम करना नहीं चाहता हैं। हमारे समय में मतदाता की तरह नेता भी जुबान के पक्के होते थे। यह कहना है 1985 में गुढ़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक रहे 92 वर्ष के भोलाराम सैनी का। यादों के झरोखे में झांकते हुए उन्होंने कहा कि पहले स्वार्थ की राजनीति बिल्कुल नहीं होती थी। लोगों में मानवता कूटकूट कर भरी हुई थी। वैसा समय दुबारा नहीं आ सकता है।

पैदल जाते थे टोली के साथ गांव-ढाणियों में

उन्होंने बताया कि पहले लोग बिना स्वार्थ के प्रचार करते थे। आज के समय में उम्मीदवारों के साथ वाहनों का काफिला नजर आता है। लेकिन हमारे समय में वाहन नहीं होते थे। लोग पैदल टोली बनाकर गांव गांव ढाणियों में प्रचार करने जाते थे। रात्रि में विश्राम भी गांवों में ही किया करते थे। लोग बहुत सम्मान करते थे, बिना खाना खाए आने नहीं देते थे। आज के समय में कोई किसी के घर दस मिनट से ज्यादा रुकना नहीं चाहता और न ही कोई रोकना चाहता है।

खर्चीला हो गया चुनाव

चुनाव जीतने वाला बिना भेदभाव के सभी का काम करता था। लेकिन आज समय में तो भेदभाव जमकर होने लगा है। साथ ही वर्तमान का चुनाव बहुत खर्चीला हो गया है। हमारे समय में बहुत कम खर्च में चुनाव होता था।

स्वच्छ राजनीति होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि स्वच्छ राजनीति होनी चाहिए। लेकिन वर्तमान समय के नेता एक दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणी करके राजनीति का स्तर गिरा रहे हैं। पूर्व में नेता राजनीति क्षेत्र में दूसरे के विचारों के विरोधी जरूर होते थे, लेकिन नेताओं के आपस में संबंध मित्रतापूर्ण होते थे।

1985 में बने विधायक

भोलाराम सैनी 1972 से 74 तक नगरपालिका के चेयरमैन रहे। 1980 में गुढ़ा विधानसभा से निर्दलीय भी चुनाव लड़ा था। बाद में 1985 में गुढ़ा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की टिकट से चुनाव लड़ा और छह हजार वोटों से जीत दर्ज कर विधायक बने थे। उन्होंने फिर 1993 भी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा था। लेकिन उनको सफलता नहीं मिली।