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दीनवा गांव के परिवार में देश सेवा का अनूठा जज्बा, पहले चारों बेटे, अब सात पोते-पोती सेना में

झुंझुनूं के गांव दीनवा में एक परिवार में देश सेवा का अटूट जज्बा है। कई सदस्य सेना में बड़े पदों पर अधिकारी हैं, कई अपना फर्ज पूरा कर गांव में सामाजिक कार्यों में जुटे हैं।

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indian army family of jhunjhunu 11 member became soldier

महिपाल मील/मंडावा(झुंझुनूं)। झुंझुनूं के गांव दीनवा में एक परिवार में देश सेवा का अटूट जज्बा है। कई सदस्य सेना में बड़े पदों पर अधिकारी हैं, कई अपना फर्ज पूरा कर गांव में सामाजिक कार्यों में जुटे हैं। वर्तमान में इस परिवार में सात भाई-बहन सेना में ड्यूटी कर रहे हैं।

गांव के किसान कुमाराम हुड्डा ने अपने चारों बेटों को सेना में भेजा। कुमाराम अब नहीं रहे लेकिन उनके बेटों के बाद अब 7 पोते-पोती देश सेवा में जुटे हैं। कुमाराम के 3 बेटों ने सेना तथा एक बेटे ने नेवी में भर्ती होकर देश की रक्षा की। चारों सेवानिवृत्त हो गए हैं। अब कुमाराम के चारों पुत्रों के 6 बेटे और एक बेटी देश सेवा में जुटे हैं।

एक ही परिवार के कुल 11 सदस्य सेना में भर्ती हुए हैं। कुमाराम के बड़े बेटे हरजीराम सबसे पहले सन् 1965 में आर्मी में भर्ती हुए। वह 1978 में नायक पद से सेवानिवृत्त हुए। दूसरे पुत्र रामेश्वर लाल 1966 में टेरिटोरियल आर्मी में भर्ती हुए। तीसरे पुत्र गोवर्धन राम नौसेना (नेवी) में भर्ती होकर 2004 में लेफ्टिनेंट पद से सेवानिवृत्त हुए। चौथे पुत्र पोकरराम 1975 में आर्मी में सैनिक पद पर भर्ती होकर सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हुए।

ये हैं सातों भाई-बहन
राजेन्द्र कुमार पुत्र हरजीराम आर्मी में नायक हैं। सन् 1998 में ही सेना में भर्ती हुए रणवीर पुत्र पोकरराम हवलदार, सन् 2001 में भर्ती हुए हरफूल पुत्र हरजीराम भी हवलदार हैं। 2001 में भर्ती हुए सुरेन्द्रकुमार पुत्र रामेश्वर लाल नायक हैं। 2003 में सगे भाई राकेश कुमार व सुधीर कुमार पुत्र गोवर्धन राम नौसेना (नेवी) में भर्ती होकर पेटी ऑफिसर पद पर सेवाएं दे रहे हैं।

मेजर पोती रचना सबसे आगे
बेटों व पोतों से आगे कुमाराम की पोती रचना पुत्री गोवर्धन राम 2012 में सेना में ऑफिसर बनी। मेजर रचना अभी लेह लद्दाख में हैं।