
सेना के रिटायर्ड नायक निहाल सिंह-फोटोः पत्रिका
सुरेंद्र डैला/चिड़ावा (झुंझुनूं)। जब 1971 का युद्ध हुआ मेरी डयूटी बाड़मेर की सरहद पर थी। दोनों सेना आमने-सामने थी। हमारे साथियों को पाकिस्तान की तरफ से दुश्मन के गोला बारूद से भरे हुए दो बड़े ट्रक आते दिखाए दिए। उनको रोकने के लिए उस जगह बारूदी सुरंग भी नहीं थी। हम लोग कम थे, वे ज्यादा। सोचा यदि असले से भरे दोनों ट्रक हमारी सरहद में घुस गए तो भारी तबाही मचाएंगे। बिना समय गंवाए निर्णय किया, दोनों ट्रकों को हमारी सरहद में नहीं घुसने देंगे चाहे हमारी जान ही चली जाए। सभी साथी जयकारे लगाते हुए दुश्मन को रोकने के लिए उसी की सरहद में घुस गए। हमें देखते हुए उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। पहली गोली मेरे सिर के पास से गुजरी। गोली से बच गया तो सोचा आज का दिन मेरा है। अगर मौत ही आती तो यह गोली ही काफी थी। उस समय ज्यादा आधुनिक हथियार नहीं थे। लेकिन हौसला आसमां से भी ऊंचा था।
पचास साल पुराने वीरता के किस्से सुनाते हुए राजस्थान के झुंझुनूं जिले की चिड़ावा तहसील के ओजटू गांव निवासी सेना के रिटायर्ड नायक निहाल सिंह के चेहरे पर मानो चमक लौट आई। वे युद्ध की यादों में खो गए। 76 बसंत देख चुके निहाल सिंह बोले- मेरे पास उस समय स्टेन गन थी। मेरा निशाना अचूक था। पहले निशाने पर ट्रक के चालक को लिया। गोली ने दुश्मन के सीने को छलनी कर दिया। पाक सेना समझ नहीं पाई अब वे क्या करे। ट्रक कौन चलाए। उस समय मुझे दुश्मन के अलावा कोई दिखाई नहीं दे रहा था। ना परिवार दिखाई दे रहा था ना भविष्य।
एक के बाद एक करीब 68 फायर कर दिए। साथियों ने भी मेरा पूरा सहयोग किया। 68 गोलियों में 24 दुश्मनों की जान ले ली। इसी दौरान मौका पाकर मैंने असले से भरे दुश्मन के दूसरे ट्रक को आग के हवाले कर दिया। हमारे पराक्रम के आगे दुश्मन ढेर हो गए। जो बचे थे पीठ दिखाकर भागने लग गए। जो घायल हुए उनको बंधक बना लिया। दुश्मन सेना के आठ जवानों को बांधकर भारत की सीमा में ले आया। इसके बाद जब उनकी वीरता उच्च अधिकारियों ने सुनी तो हर किसी ने पीठ थपथपाई। मुझे कंधों पर बिठा लिया। आखिर वह दिन भी आया। जब देश के तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी ने उनको वीर चक्र से नवाजा।
दुश्मन का ट्रक भी ले आए निहाल
नायक निहाल सिंह और उनके साथियों ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। दुश्मन फौज के 24 जवानों को मारने के बाद उनका ट्रक भी भारत ले आए। निहाल सिंह के अनुसार उस समय उस ट्रक को जोधपुर के उम्मेद पैलेस में खड़ा किया गया था।
दोनों बेटों को सेना में भेजा
निहाल सिंह ने अपने दोनों बेटों को सेना में भेजा है। बड़ा बेटा ओमप्रकाश सूबेदार मेजर के पद पर कार्यरत है। वहीं छोटा बेटा सुरेंद्र हवलदार के पद से रिटायर्ड हो चुका है। रिटायर्ड फौजी निहाल सिंह का परिवार अभी नूनियां गोठड़ा के पास रहता है।
नाम- निहाल सिंह डागर
जन्म 5 जनवरी 1945
पिता-मालाराम
मां-नारायणी देवी
सेना में भर्ती हुए- 1963 में
Published on:
05 Dec 2021 04:06 pm
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