झुंझुनू

Jhunjhunu: नारी गांव में अवैध खनन से खतरे में स्कूल, दरकती पहाड़ी से बच्चों की सुरक्षा पर संकट, तीसरे दिन खुला विद्यालय का ताला

झुंझुनूं जिले के नारी गांव में अवैध खनन से पहाड़ी दरक रही है, जिससे पास स्थित विद्यालय पर खतरा मंडरा रहा है। एसडीएम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजने की बात कही। ग्रामीणों ने आंदोलन रोकते हुए लीज निरस्तीकरण की मांग की।

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Jul 27, 2025
तीसरे दिन खुला नारी स्कूल का ताला (फोटो- पत्रिका)

चिड़ावा (झुंझुनूं): नारी गांव में अवैध खनन और ब्लास्टिंग से पहाड़ी दरकने की घटना के बाद उपजे तनाव के बीच शनिवार को विद्यालय का ताला खोल दिया गया। जिला कलेक्टर से बातचीत के बाद ग्रामीणों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया है। इससे स्कूल में पुन: शिक्षण कार्य शुरू हो गया।


वहीं, दोपहर में एसडीएम डॉ. नरेश सोनी, डीएसपी विकास धींधवाल सहित अधिकारियों की टीम गांव पहुंची और विद्यालय भवन व पहाड़ी क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्हें ग्रामीणों ने बताया कि पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इससे घरों में भी दरारें आ चुकी हैं।

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विद्यालय भवन में भी हादसे की आशंका बन रही है। उन्होंने पहाड़ी में आवंटित लीजों को निरस्त करवाने की मांग की। इस पर एसडीएम डॉ. सोनी ने कहा कि प्रकरण की रिपोर्ट तैयार कर जिला कलेक्टर को भेजी जाएगी।


अधिकारी और ग्रामीण रहे मौजूद


ग्रामीणों के आंदोलन को देखते हुए एसडीएम सोनी, डीएसपी धींधवाल, पीडब्ल्यूडी एक्सईएन रोहिताश, सीबीईओ डॉ. उमादत्त झाझड़िया, एसीबीईओ डॉ. कयूम अली सहित अन्य अधिकारी राजकीय विद्यालय पहुंचे थे। इस दौरान ग्रामीण भी वहां आ गए। एसडीएम ने स्टाफ सदस्यों के साथ विद्यालय भवन का जायजा लिया।


पीडब्ल्यूडी एक्सईएन से चर्चा की। ग्रामीणों ने भी मामले से लिखित में उन्हें अवगत करवाया। इसके बाद एसडीएम ने जोधा का बास की तरफ धंसे आम रास्ते और मेघवाल बस्ती की तरफ गिरे पहाड़ के हिस्से को भी देखा।


हादसा टला नहीं


ग्रामीण वेदपाल लमोरिया, राधाकृष्ण समेत अन्य ने बताया कि पहाड़ी से लगातार पत्थर गिर रहे हैं। इससे रातभर जागकर बचाव करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी का बड़ा हिस्सा कभी भी दरक सकता है।


एक्सईएन ने माना, भवन भूकंप रोधी नहीं


पीडब्ल्यूडी एक्सईएन रोहिताश ने माना है कि विद्यालय भवन भूकंप रोधी नहीं है। यानी कि पहाड़ी का बड़ा हिस्सा गिरता है तो भवन पर भी असर पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि भवन में बिंब नहीं भरे गए। इस कारण भवन पर तेज कंपन का असर हो सकता है।


विद्यालय के अधिकतर कमरों में दरारें बन चुकी हैं। उधर, सीबीईओ डॉ. उमादत्त झाझड़िया का कहना है कि छह कमरें पूर्णतया सुरक्षित हैं। जिनमें बच्चों को बिठाकर पढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य कमरे ज्यादा खराब स्थिति में नहीं हैं, लेकिन मरमत की जरूरत है।


झालावाड़ हादसे से सबक जरूरी


ग्रामीणों ने कहा कि झालावाड़ में हुए जर्जर स्कूल हादसे से सबक लेना जरूरी है। विद्यालय और पहाड़ी की दूरी महज कुछ ही फीट है। विद्यालय में 130 के करीब बच्चे अध्ययनरत हैं। पत्थर गिरने से कंपन पैदा होता है, जिससे भवन की छत गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में अधिकतर बच्चे जरूरतमंद परिवारों से हैं, इसलिए प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा।


इनका कहना है


विद्यालय भवन और पहाड़ी के धंसे हिस्से की तरफ का जायजा लिया, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर को भेजी जा रही है। बच्चों के भविष्य से किसी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
-डॉ. नरेश सोनी, एसडीएम, चिड़ावा

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Updated on:
27 Jul 2025 11:28 am
Published on:
27 Jul 2025 11:27 am
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