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शहीद की बहन बोली : अब किसे बांधूंगी राखी, बार-बार बेहोश होती रही वीरांगना

Jhunjhunu news : शहीद अजय सिंह की पार्थिव देह पहुंची, उनकी पत्नी शालू कंवर ताबूत से लिपटकर रो पड़ी। वह दो बार बेहोश होकर गिर पड़ी। बुआ की बेटी बहन अल्का का भी यही हाल हुआ, रक्षाबंधन से पहले भाई देह देखकर उसने कहा अब किसकी कलाई पर राखी बांधूंगी भैया...।

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झुंझुनूं। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में शहीद हुए झुंझुनूं जिले के दो जाबांज जवान एक साथ तिरंगे में लिपटकर अपने गांव पहुंचे तो लोगों की आंखों से आंसू झरझर बहने लगे। साथ ही उनका सीना गर्व से चौड़ा भी हुआ। दोनों की पार्थिव देह को मुरादपुर से तिरंगा रैली के साथ उनके गांव ले जाया गया तो उनके घर में कोहराम मच गया। बाद में शहीद अजय सिंह नरूका का गांव भैंसावता कलां में और शहीद बिजेन्द्र सिंह का गांव डूमोली कलां में पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोनों एक साथ वर्ष 2018 में सेना में भर्ती हुए थे और साथ ही तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचे।

भैंसावता कलां में जैसे ही शहीद अजय सिंह की पार्थिव देह पहुंची, उनकी पत्नी शालू कंवर ताबूत से लिपटकर रो पड़ी। वह दो बार बेहोश होकर गिर पड़ी। बुआ की बेटी बहन अल्का का भी यही हाल हुआ, रक्षाबंधन से पहले भाई देह देखकर उसने कहा अब किसकी कलाई पर राखी बांधूंगी भैया…।

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अजय के पिता कमल सिंह नरूका सेना से रिटायर हैं, उन्होंने सेना की टोपी पहनकर बेटे को सैल्यूट किया। उनकी आंख में आंसू थे तो बेटे की शहादत पर गर्व भी था। मां का भी यही हाल था। अजय के भाई करणवीर सिंह ने मुखाग्नि दी। केबीनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी अंत्येष्टी में शामिल होकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

पिता ने कहा : बेटे पर गर्व है, मां दुलारती रही लाडले को

Jhunjhunu डूमोली कलां में शहीद बिजेन्द्र सिंह के परिवार वालों को मंगलवार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी। बुधवार सुबह बिजेंद्र के पिता रामजीलाल घर के पास स्थित खेत में चले गए। उसी दौरान घर के बाहर टेंट लगाता देखा तो वह एकदम से कुछ समझ ही नहीं पाए। तब बिजेन्द्र के भाई दशरथ सिंह पिता के पास गए और उनसे लिपटकर रो पड़े। पिता रामजीलाल ने जैसे ही लाडले बेटे के शहादत की खबर सुनी, वह बिलख पड़े।

फिर खुद को संभालते हुए बोले मुझे बेटे पर गर्व है। उसने उसने अपना फर्ज निभाया है, वह देश के लिए लड़ा है। उधर, वीरांगना अंकिता अपने पति की पार्थिव देह के लिपटकर बेसुध हो गई। अंकिता ने बताया कि उसकी ऑपरेशन पर जाने से पहले बिजेन्द्र से बात हुई थी, उसके बाद उनके शहीद होने की जानकारी मिली है। मां धोली देवी बेटे के शव को दुलारती रही। तीन साल के बेटे विहान ने मुखाग्नि दी।