
सावित्री देवी
राजेश शर्मा
मां पहली गुरु होती है। उसकी डांट, उसके संस्कार, उसकी दुलार सभी का बच्चों के जीवन पर गहरा असर पड़ता है। मां सब कुछ जानती है। बेटे की उदासी का कारण भी बिना पूछे ही जान जाती है। वह चाहती है उसके बेटे बेटियां नाम कमाएं। आगे बढ़ें। चाहे उसके लिए उसे कितनी भी मेहनत करनी पड़े। आज मातृत्व दिवस है। आज हम बता रहे हैं ऐसी दो मां के बारे में खुद तो ज्यादा नहीं पढ़ी लेकिन उनके बेटी-बेटियां आइएसएस और आइपीएस हैं।
एक ही बात कहती, पढ़ोगे तो आगे बढ़ोगे
मेरा पीहर कालेरों का बास गांव में है। मुझे याद नहीं है मैं स्कूल कितने दिन गई। शादी के बाद अलसीसर आ गई। पीहर की बजाय अलसीसर बड़ा कस्बा था। यहां बच्चों को हर दिन स्कूल जाते हुए देखती। उनको देखकर ठान लिया, मैं तो नहीं पढ़ी लेकिन मेरे बच्चों को जरूर पढ़ाऊंगी। यह कहना है अलसीसर के निकट रामू की ढाणी निवासी सावित्री देवी का। सावित्री ने बताया कि मैंने बच्चों को खूब पढ़ाया। घर से स्कूल एक कोस से ज्यादा दूर था। बच्चे स्कूल नहीं जाते तो खुद पैदल-पैदल छोड़कर आती। पांचवीं तक ढाणी के निकट सरकारी स्कूल में पढ़ाया। मेरी बहन भगवती देवी ने भी बच्चों को खूब पढ़ाया।
दसवीं और बारहवीं में मेरिट में आया
बच्चों एक ही बात कहती मैं तो नहीं पढ़ी लेकिन मैं चाहती हूं कि तुम अफसर बनो। बेटा अनिल कुमार बड़ा हुआ। पढाई में मन लगाने लगा। वर्ष 1995 में दसवीं में मेरिट में आया। बारहवीं में भी मेरिट में आया। फिर डॉक्टर की पढा़ई की। अब उत्तरप्रदेश में भारतीय पुलिस सेवा में है। वर्तमान में अनिल भदोई जिले में एसएसपी हैं।
बेटा आइपीएस और बेटी आइएएस बनी
इसी प्रकार बेटी मंजू को पढ़ाया। पहले उसने डॉक्टर बनने की पढाई की। डॉक्टर बनने के बाद आइएएस की तैयारी करने दिल्ली चली गई। वहां उसने मन से तैयार की। मैं रोज उसे फोन कर खाने व पढ़ने के बारे में पूछती। उसे भी यही कहती बेटी पढ़ने में ध्यान रखना। उसने भी आइएएस की परीक्षा उत्तीर्ण की। वर्तमान में मंजू अलवर में यूआइटी की सचिव है। मुझे उस दिन सबसे ज्यादा खुशी हुई जब एक ही दिन बेटा आइपीएस और बेटी आइएएस बनी। दोनों ने एक ही बैच में ट्रेनिंग पूरी की। अब बेटा और बेटी बड़े पदों पर है। उनके पास खूब काम है, लेकिन दोनों हर दिन एक बार वीडियो कॉल जरूर करते हैं।
फोटो: मां सुनीता के साथ नवीन
नवलगढ़ तहसील के देलसर खुर्द गांव निवासी सुनीता ने बताया कि उसका पीहर घोड़ीवारा में है। खुद तो ज्यादा नहीं पढ़ी, लेकिन बच्चों की पढाई पर ध्यान दिया। उनके सुबह उठने, तैयार होने व पढाई का पूरा ध्यान रखा। उस समय अंग्रेजी जानती नहीं थी। लेकिन पांचवीं के बाद बेटे को अंग्रेजी मीडियम में पढाया। मुझे अंग्रेजी नहीं आती थी, लेकिन फिर भी बेटे से अंग्रेजी में पाठ सुनती। बीच में उसे यूं ही टोक देती, गलत पढ़ रहा है दुबारा सुना। उसे कहती बेटा पढाई को कोई चुरा नहीं सकता।
आइएएस बनने के बाद बेटे की शादी, नहीं लिया दहेज
जिसने पढाई कर ली उसे कोई आगे बढ़ने से नहीं रोक सकता। आज बेटा नवीन कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी है। उसकी ड्यूटी अभी बिहार की राजधानी पटना में पटना सदर अनुमंडल पदाधिकारी की है। छोटा बेटा कार्तिक बिजनेस संभाल रहा है। सुनीता ने बताया कि आइएएस बनने के बाद बेटे की शादी हुई तो आइआरएस बहू महिमा के पीहर वालों ने दहेज व कार देने का प्रस्ताव रखा लेकिन मैंने मना कर दिया। जीवन में वही धन समृद्धि देता है जो खुद का कमाया हो। मैं दहेज की विरोधी रहीं हूं।
Updated on:
08 May 2022 02:40 pm
Published on:
08 May 2022 02:17 pm
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