
बुहाना. भैंरोसिंह शेखावत के साथ सुन्दरलाल।
राजेश सिंह तंवर
झुंझुनू /बुहाना. विधानसभा चुनाव में टिकट के लिए आज नेताओं में आपसी मनुमुटाव पैदा हो जाते हैं। एक जमाना ऐसा भी था, जब बिना मांगे ही पार्टी का टिकट मिल जाया करता था। यह कहना है पांच बार सूरजगढ़ से और दो बार पिलानी से विधायक रह चुके 90 साल के वरिष्ठ नेता सुन्दरलाल का। काका के नाम से विख्यात पूर्व विधायक सुंदरलाल ने पुराने समय के चुनावों को याद करते हुए कहा कि आजकल की तरह पहले टिकटों के लिए मारामारी नहीं होती थी। अचानक दिल्ली बुलाकर टिकट दे दिया जाता था। बात वर्ष 1972 की है।
उस वक्त मुझे राजनीति की कोई समझ नहीं थी। फिर भी कांग्रेस नेताओं ने मुझे दिल्ली बुलाया और टिकट देकर कहा कि आपको सूरजगढ़ से चुनाव लड़ना है। मैं टिकट लेकर आया और गांव-गांव घूम कर प्रचार किया। जनता ने वोट दिए और मैं चुनाव जीत गया।
प्रचार में जोंगा लेते थे काम में
चुनाव में प्रचार के लिए जोंगा जीप को पैंतीस रुपए में निलामी में छुडाया था। पांच सौ रुपए रिपेयर पर खर्च किए। इसी जीप से पूरे इलाके में प्रचार किया। प्रचार सामग्री का कोई खर्चा नहीं था। प्रचार सामग्री जयपुर और दिल्ली से आती थी। हम केवल बांटते थे। मतदाताओं के घर छाछ-राबड़ी-चटनी-रोटी खाते। जहां मर्जी रात को ठहर जाते। अगले दिन फिर प्रचार में जुट जाते। चुनाव कार्यालयों का कोई चलन नहीं था। कोई सूचना गांव में पहुंचाने के लिए आदमी भेजना पड़ता था। आदमी पैदल या ऊंट पर बैठकर जाता। झंडे-बैनर गिनती के मिलते थे। उन्हें केवल विश्वास वाले लोगों को दिया जाता था।
मात्र दस हजार रुपए हुए खर्च
सुन्दरलाल मूलत: बुहाना पंचायत समिति के कलवा गांव के रहने वाले हैं। बाद में काका के नाम से प्रसिद्ध हुए सुन्दरलाल पुराने दिन याद करते हुए कहते हैं कि मैंने सूरजगढ़ विधानसभा से पहला चुनाव 1972 में कांग्रेस की टिकट पर लड़ा। उस वक्त चुनाव में मात्र दस हजार रुपए खर्च हुए। यह राशि मिलने वाले लोगों से लेकर काम चलाया। वहीं दूसरे चुनाव में पन्द्रह हजार रुपए खर्च हुए। विधायक बनने के बाद एक बैठक के सौ रुपए मिलते थे।
मतदाताओं से जुड़ाव हुआ कम
वर्तमान समय में मतदाता और राजनेताओं में आपसी जुड़ाव खत्म हो गया है। पहले गांव में जाकर मतदाताओं के बीच बैठकर हंसी-ठिठोली करते। विकास पर चर्चा होती। मतदाता-नेता में कोई बिचौलिया नहीं था। मतदाता से सीधा आपसी जुड़ाव था। अब धन-बल का जमाना आ गया। चुनावों के खर्च बढ़ गए। चुनाचों में द्वेषता बढ़ी है।
Published on:
14 Oct 2023 12:08 pm
बड़ी खबरें
View Allझुंझुनू
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
