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241 साल पुरानी है यह बावड़ी, यहां हो चुकी बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग, गर्मी में होता सर्दी का एहसास

Rajasthan Foundation Day: प्राचीन व स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना देखना है तो आप राजस्थान के झुंझुनूं शहर की प्रसिद्ध मेड़तनी बावड़ी पर चले आइए। इस विशाल बावड़ी में कमरों की इंजीनियरिंग इस प्रकार से की गई है, यहां जेठ के माह की दोपहरी में भी गर्मी का एहसास नहीं होता। नीचे की तरफ बने कमरों व झरोखों में कूलर जैसी शीतल हवा आती है।

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medtani bavdi jhunjhunu

Rajasthan Foundation Day : 241 साल पुरानी है यह बावड़ी, यहां हो चुकी बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग, गर्मी में होता सर्दी का एहसास

Rajasthan Foundation Day: प्राचीन व स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना देखना है तो आप राजस्थान के झुंझुनूं शहर की प्रसिद्ध मेड़तनी बावड़ी पर चले आइए। इस विशाल बावड़ी में कमरों की इंजीनियरिंग इस प्रकार से की गई है, यहां जेठ के माह की दोपहरी में भी गर्मी का एहसास नहीं होता। नीचे की तरफ बने कमरों व झरोखों में कूलर जैसी शीतल हवा आती है। मनसा माता मंदिर की पहाडिय़ों की तलहटी में स्थित इस बावड़ी का निर्माण सार्दुल सिंह शेखावत की पत्नी मेडतनी ने करवाया था। इलाई कूपर की पुस्तक : द पेंटेंड टाउन ऑफ शेखावाटी के अनुसार इस बावड़ी का निर्माण सन 1783 में किया गया था। इस प्रकार यह बावड़ी करीब 241 साल पुरानी है। यह लगभग 150 फीट से ज्यादा गहरी है। इसमें एक कुआं भी है।


चर्म रोग होते थे दूर
बावड़ी की सुरक्षा में तैनात रिटायर्ड फौजी सुरेश सैनी ने बताया कि यहां हर दिन पंद्रह से बीस देसी व विदेशी पर्यटक आते हैं। सर्दियों में विदेशी पर्यटकों की संख्या ज्यादा रहती है। यहां बॉलीवुड की फिल्मों व वेब सीरीज की शूटिंग हो चुकी है। अभी इसकी सफाई करवा दी गई है। सैनी ने बताया कि उस समय के लोग कहते हैं पानी में कुछ इस प्रकार के रसायन मिले हुए थे कि उसमें नहाने से अनेक प्रकार के चर्म रोग दूर हो जाते हैं। एक चर्चा यह भी है रसायनों के ज्यादा प्रभाव के कारण इस बावड़ी के पानी को पीने के लिए उत्तम नहीं माना जाता था।


कभी यही था मुख्य मार्ग
पर्यटन विभाग के सहायक निदेशक देवेन्द्र कुमार के अनुसार जिस समय इस बावड़ी का निर्माण किया गया था, तब झुंझुनूं से दूसरे बड़ों शहरों में जाने का मुख्य मार्ग यही था। उस समय इस मार्ग को सिंघाना- डीडवाना मार्ग के नाम से जाना जाता था। इसका निर्माण घरठ के चूने व मजबूत पत्थरों से किया गया है।


इसकी मुख्य दीवार कहीं पांच फीट चौड़ी तो कहीं दस फीट तक चौड़ी है। इसके मुख्य प्रवेश द्वार से पानी की सतह तक सीढियां बनी हुई है। 128 सीढियां व कुआं अभी भी देखाई देता है। दीवारों के अंदर झरोखे व कमरे बने हुए हैं। बावड़ी बनाने का मदसद यह था कि राह चलते लोग यहां पानी पी सकें व कुछ समय आराम कर सकें।


ऐसे पहुंचे
यह बावड़ी देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 226 किलोमीटर दूर व जयपुर से करीब 180 किलोमीटर दूर है। यहां सड़क मार्ग से आया जा सकता है। निकट का एयरपोर्ट जयपुर है। इसके अलावा झुंझुनूं में भी एयर स्टिप है। यहां रेल मार्ग से भी आया जा सकता है। यह बावड़ी झुंझुनूं शहर में मनसा माता की पहाडिय़ों की तलहटी में बनी हुई है।

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