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Rajasthan: 1692 एएनएम को लोन देकर भूला विभाग, 26 साल बाद आई याद, स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप

राजस्थान के 18 जिलों में एएनएम से ब्याज सहित 11.11 करोड़ रुपए वसूली के आदेश जारी किए गए हैं। जिसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप मच गया है। यह वसूली 26 साल पुराने लोन को चुकता करने के लिए की जानी है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर-फ्रीपिक

झुंझुनूं। राज्य में 26 साल पहले महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (एएनएम) को दुपहिया वाहन के लिए ब्याजमुक्त ऋण दिया गया था, लेकिन इस ऋण राशि की वसूली नहीं हुई। अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय ने प्रदेश के 18 जिलों की 1692 एएनएम से ब्याज सहित वसूली के आदेश संबंधित मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को दिए हैं। वसूली के आदेश से स्वास्थ्यकर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है।

वर्ष 1999 में केंद्र सरकार की यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड योजना के तहत एएनएम को दुपहिया वाहन खरीदने के लिए 15 हजार रुपए का ब्याजमुक्त ऋण दिया गया था, ताकि वे गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाएं दे सकें। इस ऋण की मासिक किस्त 375 रुपए तय की गई थी, जिसे लगभग 40 महीनों में चुकाना था।

13 प्रतिशत ब्याज के साथ वसूली के आदेश

लेकिन न तो नियमित कटौती हुई और न ही सेवा पुस्तिकाओं में इसका कोई उल्लेख किया गया। कुछ मामलों में शुरुआती किस्तों की कटौती जरूर हुई, लेकिन बाद में प्रक्रिया ठप हो गई। अब 26 साल बाद यह बकाया 13 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से बढ़कर प्रति एएनएम 65,693 तक पहुंच गया है।

ऑडिट में हुआ खुलासा, कार्रवाई तेज

योजना के तहत यह स्पष्ट था कि ऋण का उल्लेख सेवा पुस्तिका में किया जाएगा। मासिक वेतन से किस्तें कटेंगी और सभी दस्तावेज संलग्न होंगे, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। विभागीय ऑडिट में गड़बड़ी सामने आने के बाद ही यह मामला खुला।

इन जिलों में वसूली

कोटा, अलवर, जयपुर, दौसा, झुंझुनूं, चूरू, अजमेर, झालावाड़, उदयपुर, सीकर, सवाईमाधोपुर, बूंदी, बाड़मेर, धौलपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और टोंक।

चिकित्सा विभाग के ऑडिट में आया सामने

चिकित्सा विभाग के 2024-25 के ऑडिट में सामने आया कि 1692 एएनएम पर 2.53 करोड़ रुपए बकाया है। ब्याज जोड़ने पर यह राशि 11.11 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

विभागीय लापरवाही उजागर

मामले में विभागीय अनदेखी भी सामने आई है। विभाग के पास न तो ऋण वितरण की रसीदें हैं, न वाहन खरीद के बिल या रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र हैं। अधिकांश की सेवा पुस्तिकाओं में भी इस ऋण का कोई उल्लेख नहीं है।

यह ऋण योजना बहुत पुरानी है और ब्याजमुक्त थी, लेकिन अब निदेशालय से निर्देश मिला है कि बकाया राशि ब्याज सहित वसूल की जाए। सभी बीसीएमओ को पत्र भेजे हैं। फिलहाल पुरानी फाइलें और सेवा पुस्तिकाएं खंगाली जा रही हैं। जिन पर बकाया है, उनसे नियमानुसार वसूली की जाएगी। -डॉ. छोटेलाल गुर्जर, सीएमएचओ झुंझुनूं