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हत्या की सजा काटी, शिक्षक परीक्षा भी पास की…अब मांग रहा नौकरी

हाईकोर्ट ने प्रारम्भिक शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक, झुंझुनूं के कारागार उप अधीक्षक व अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न हत्या के मामले में सजा पूरी कर चुके युवक को परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी में रखने का आदेश दिया जाए?

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झुंझुनूं। हाईकोर्ट ने प्रारम्भिक शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक, झुंझुनूं के कारागार उप अधीक्षक व अन्य को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न हत्या के मामले में सजा पूरी कर चुके युवक को परीक्षा पास करने के बाद सरकारी नौकरी में रखने का आदेश दिया जाए? जवाब के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। अपनी तरह के इस पहले मामले में युवक को परीक्षा पास करने के बावजूद शिक्षा विभाग ने नियुक्ति देने से इनकार कर दिया।

न्यायाधीश इन्द्रजीत सिंह ने नवलगढ़ के निकट पूनिया का बास निवासी परमानंद की याचिका पर यह आदेश दिया है। परमानंद की ओर से उसके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि प्रार्थी अध्यापक लेवल (प्रथम) पद की परीक्षा में उत्तीर्ण हो गया। ओबीसी की वरीयता सूची में उसका नाम है, लेकिन अतिरिक्त निदेशक (प्रारंभिक शिक्षा) ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित होने के कारण उसे नियुक्ति का पात्र नहीं माना है।

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भर्ती की विज्ञप्ति में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि कोई व्यक्ति 302 में सजायाफ्ता है तो उसे नौकरी नहीं मिलेगी, बल्कि सिर्फ नैतिक आचरण के अपराधों के संबंध में विवरण है। राजस्थान पंचायत राज सर्विस रूल्स में भी यह नहीं है कि हत्या के आरोपी को नियुक्ति का पात्र नहीं माना जाएगा बल्कि यह लिखा है कि नैतिक आचरण से संबंधित मामले में सजा होने पर अभ्यर्थी नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

प्रार्थीपक्ष ने बताया कि प्राथी ने अपने फार्म में भूतपूर्व कैदी होने की बात लिखी है। उसने कोई तथ्य नहीं छिपाया है। प्रार्थी का जेल में आचरण अच्छा रहा, इसलिए उसे खुले बंदीगृह में भेजा गया। 14 दिसंबर 2018 को स्थाई पैरोल मिली और 28 मार्च 2021 को प्रार्थी को समय पूर्व रिहाई दी गई। प्रार्थी ने जेल में रहते हुए ह्यूमन राइट्स में डिप्लोमा किया एवं जमानत के दौरान ही बीए व एमए किया है।

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आजीवन करावास की सजा हुई थी
पूनिया का बास में वर्ष 1997 में हुई हत्या का दोषी मानते हुए जिला न्यायाधीश झुंझुनूं ने वर्ष 2001 में परमानंद को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।