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Rajasthan: विदेश की नौकरी छोड़ गांव में बना रहा अयोध्या के राम मंदिर का मॉडल, गांव के कई युवाओं को दे रहा रोजगार

देश के कई युवा आजकल विदेश की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार को अपना रहे हैं और अच्छा कमा भी रहे हैं। इनमें से ही एक है गुढ़ागौड़जी तहसील के छोटे से गांव छावसरी का 25 वर्षीय कमलेश कुमावत।
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देश के कई युवा आजकल विदेश की नौकरी छोड़कर स्वरोजगार को अपना रहे हैं और अच्छा कमा भी रहे हैं। इनमें से ही एक है गुढ़ागौड़जी तहसील के छोटे से गांव छावसरी का 25 वर्षीय कमलेश कुमावत। वह लीबिया में मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल में फोरमैन के रूप में कार्यरत था। वहां अच्छा-खासा पैकेज मिल रहा था लेकिन मातृभूमि का प्यार उसे वापस खींच लाया। यहां उसने खुद का स्टार्टअप शुरू कर गांव के कई युवाओं को रोजगार दिया है।

बना रहा है छोटे राम मंदिर
कमलेश ने गांव लौटकर खुद कर हुनर काम में लिया। वह इन दिनों गांव में ही अयोध्या के श्रीराम मंदिर का विशेष मॉडल तैयार कर रहा है। अब तक उसने एक हजार मॉडल बना लिए हैं। अयोध्या से सैकड़ों किलोमीटर दूर राम मंदिर की तरह बन रहे यह छोटे मंदिर खूब पसंद भी किए जा रहे हैं। साथ ही उसकी इस कला में गांव के अन्य युवा भी पारंगत हो रहे हैं। उसके साथ गांव के 15 से 20 लड़के और लड़कियां काम कर रहे हैं। कमलेश का मानना है कि इससे घरेलू उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में अन्य युवाओं को भी काम मिल सकेगा।

10 माह पहले सोचा और लग गया काम में
भगवान श्रीराम की जन्म भूमि पर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है। इसे लेकर देश भर में इन दिनों वातावरण राममय है। कमलेश ने बताया कि उसने 10 माह पहले अयोध्या के राम मंदिर का मॉडल इंटरनेट पर देखा। इसके बाद मिशन के रूप में लग गया। इसके उसने लाखों रुपए का सामान और मशीन खरीदी। इससे पहले वह बद्रीनाथ मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, केदारनाथ मंदिर, आरबीआई आदि के मॉडल तैयार किए। बाद में राम मंदिर बनाना शुरू किया। कमलेश में बताया कि उसका तैयार किया हुआ राम मंदिर का मॉडल व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अयोध्या स्थित राम मंदिर सहित अन्य मंदिरों में भी भेंट करेगा।

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राम दरबार भी है विराजमान
गांव में तैयार किए गए यह छोटे मंदिर अयोध्या की तरह जगमगाहट करते हैं और मंदिर में राम दरबार भी विराजमान हैं। कमलेश ने बताया कि उसने इस काम के लिए किसी से ट्रेनिग नहीं ली। रातों को जाग कर खुद के दिमाग से ही यह तैयार कर लिया।

पूर्वज बनाते थे मंदिर और धर्मशाला
कमलेश ने बताया कि उसके दादा नारायण कुमावत ने उबली का धाम मंदिर का भी निर्माण किया। ऐतिहासिक धर्मशाला आदि का निर्माण किया। पूर्वजों की कलाकारी सनातन धर्म से जुड़ी हुई थी। उसी को आगे बढ़ाने के लिए ही उसने मंदिर निर्माण कार्य शुरू किया।

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