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Rajasthan Snakebite : मानसून से पहले बढ़ा झुंझुनूं में ‘साइलेंट किलर’ का खतरा, क्या है सर्पदंश का लक्षण, जानिए?

Rajasthan Monsoon Snakebite :मानसून की आहट के साथ ही झुंझुनूं जिले में सर्पदंश का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। सर्पदंश के ये लक्षण दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

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Rajasthan Snakebite symptoms What silent killer threat increases Jhunjhunu monsoon

Rajasthan Monsoon Snakebite : फोटो - AI

Rajasthan Monsoon Snakebite : मानसून की आहट के साथ ही झुंझुनूं जिले में सर्पदंश का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। बारिश शुरू होते ही बिलों में रहने वाले सांप सुरक्षित ठिकाने और भोजन की तलाश में बाहर निकल रहे हैं। खेतों, ढाणियों और रिहायशी इलाकों में सांपों की बढ़ती आवाजाही लोगों के लिए चिंता का कारण बन गई है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष अब तक बीडीके अस्पताल में सर्पदंश के 33 मामले दर्ज हो चुके हैं, जो पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में थोड़ी-सी असावधानी भी जान पर भारी पड़ सकती है। हालांकि समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने पर अधिकांश मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

स्नेक रेस्क्यूअर बीएल सैनी के अनुसार सर्दियों के दौरान अधिकांश सांप बिलों में ही रहते हैं। मानसून से पहले उमस बढ़ने और बारिश के दौरान निकल आते हैं। यही कारण है कि हर बिलों में पानी भरने पर वे बाहर वर्ष बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से वृद्धि होती है। उन्होंने बताया कि खेतों में काम करने वाले किसान, रात के समय बाहर सोने वाले लोग और झाड़ियों के आसपास रहने वाले परिवार सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।

बारिश के साथ बढ़ रही चिंता

ग्रामीण क्षेत्रों में खरीफ फसलों बुवाई का समय शुरू हो गया है। किसान खेतों में अधिक समय बिता रहे हैं। वहीं घरों के आसपास उगी झाड़ियां, लकड़ी और कबाड़ के ढेर भी सांपों के छिपने के सुरक्षित स्थान बन जाते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ घर और आसपास के क्षेत्र की नियमित सफाई रखने तथा रात के समय टॉर्च का उपयोग करने की सलाह दे रहे हैं।

जान बचा सकता है सही प्राथमिक उपचार

बीडीके अस्पताल के डॉ. राहुल चौधरी ने बताया कि सर्पदंश होने पर मरीज को घबराने न दें और तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। प्रभावित अंग को स्थिर रखें तथा साबुन और साफ पानी से घाव को धोकर साफ ड्रेसिंग करें। अंगूठी, कड़ा, घड़ी या जूते जैसी कसी हुई वस्तुएं हटा दें और मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल पहुंचाएं, जहां एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध हो।

झाड़-फूंक और घरेलू नुस्खे पड़ सकते हैं भारी

चिकित्सकों का कहना है कि आज भी कई लोग सर्पदंश के बाद झाड-फूंक, जड़ी-बूटी या घरेलू उपचार के भरोसे समय गंवा देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। धाव पर चीरा लगाना, जहर चूसने का प्रयास करना, रस्सी या कपड़े से अंग को कसकर बांधना तथा बर्फ या गर्म सेंक करना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञ केवल चिकित्सकीय उपचार पर भरोसा करने की सलाह देते हैं।

सर्पदंश के ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क

सांप के काटने पर दांतों के निशान, तेज दर्द, सूजन, लालिमा, त्वचा का रंग बदलना और छाले पड़ना सामान्य लक्षण हैं। यदि सांप जहरीला हो तो मरीज को उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में तकलीफ, धुंधला दिखाई देना, पलकों का झुकना, नाक या मसूड़ों से खून आना, मांसपेशियों में कमजोरी, चक्कर आना, बेहोशी, अनियमित हृदय गति और रक्तचाप कम होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है।

हर साल बढ़ रहे मामले

वर्ष - सर्पदंश के मामले
2021 - 37
2022 - 52
2023 - 48
2024 - 80
2025 - 100
2026 - 33
(आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष सर्पदंश के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।)

ASV इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध

अस्पताल में पॉलीवैलेंट एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जो जहरीले सांपों की चार प्रमुख प्रजातियों के जहर के प्रभाव को नियंत्रित करने में सक्षम हैं। आपातकालीन इकाई, वार्ड और आईसीयू में प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में मरीजों का उपचार किया जाता है। उन्होंने बताया कि बीडीके अस्पताल में सर्पदंश के उपचार के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों का सफल उपचार किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र भाम्बू, पीएनओ बीडीके अस्पताल, झुंझुनू

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