
अनीता पूनिया (पत्रिका फोटो)
Jhunjhunu Chirawa Anita Poonia News: चिड़ावा (झुंझुनूं): झुंझुनू के चिड़ावा की रहने वाली अनीता पूनिया कुछ साल पहले तक शानदार जिंदगी जी रही थीं। सब कुछ बेहतरीन था, लेकिन दिल में हमेशा अपने देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की कसक थी। जब वह दुबई से भारत लौटीं तो चिड़ावा की सड़कों पर कचरा बीनते और भीख मांगते मासूमों को देखकर उनका दिल रो पड़ा। बस, इसी एक पल ने उनकी जिंदगी का रुख हमेशा के लिए बदल दिया।
बता दें कि दुबई के ऐशो-आराम को पीछे छोड़ अनीता ने चिड़ावा के बाई रोड क्षेत्र में 'सरला पाठशाला' की शुरुआत की। उनका मकसद साफ था, जिन हाथों में मजबूरी का सितम है, वहां कलम और किताबें थमाना। आज उनके इसी निस्वार्थ समर्पण और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें जयपुर में 'शिक्षा सेवा प्रवण पुरस्कार' से सम्मानित किया जा रहा है।
अनीता पूनिया को यह प्रतिष्ठित सम्मान 18 जून को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में आयोजित होने वाले 'अखिल भारतीय संस्कृत विद्वत सम्मान व विशिष्ट व्याख्यान समारोह' (वार्षिकोत्सव) में दिया जाएगा। यह भव्य कार्यक्रम संस्कृत के प्रकांड विद्वान और राष्ट्रपति सम्मानित स्वर्गीय आचार्य पंडित बद्री प्रसाद शास्त्री की पुण्य स्मृति में आयोजित हो रहा है।
संस्कृति संवर्धन संस्थान जयपुर और राजस्थान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस समारोह में समाज और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट काम करने वाली विभूतियों को सराहा जाएगा। संस्थान की जिला प्रभारी डॉ. मधुबाला बजाज ने बताया कि कार्यक्रम श्रीबादरायण धर्म दर्शन पीठ प्रपूर्णा के अध्यक्ष आचार्य पंडित प्रभुदत्त शास्त्री के संरक्षण और पंडित मदन मोहन शास्त्री के समन्वय में आयोजित होगा।
इस गरिमामयी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री आशुतोष मिश्रा होंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दिल्ली सरकार के सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश व्यास और सारस्वत अतिथि के रूप में राजस्थान विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. ज्योत्सना वशिष्ठ शिरकत करेंगी। संस्थान के अध्यक्ष पंडित गोपाल चंद्र शर्मा ने कहा कि अनीता जी जैसे समाजसेवियों का सम्मान पूरे समाज को प्रेरित करता है।
अनीता पूनिया के लिए यह सफर काफी मुश्किल भरा था। जब उन्होंने खानाबदोश और बेहद जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, तो समाज की बेरुखी और आर्थिक तंगी सबसे बड़ी दीवार बनकर सामने आई। लेकिन अनीता ने हार नहीं मानी। पति विकास पूनिया और परिवार के मजबूत साथ के दम पर उन्होंने अपने सीमित संसाधनों से बच्चों को मुफ़्त शिक्षा, ड्रेस, किताबें और भोजन देना शुरू किया।
धीरे-धीरे यह कोशिश एक कारवां बन गई। आज करीब 97 बच्चे सरला पाठशाला के जरिए शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़ चुके हैं। यहां बच्चों को सिर्फ क ख ग या एबीसीडी ही नहीं, बल्कि विज्ञान, गणित, भाषा और जीवन के नैतिक संस्कार भी सिखाए जा रहे हैं। झुग्गियों के जो परिवार कल तक शिक्षा को बोझ समझते थे, आज अनीता के प्रयासों से उनकी सोच बदल चुकी है। अब पूरा इलाका उन्हें आदर और प्यार से 'टीचर दीदी' कहकर पुकारता है।
Updated on:
16 Jun 2026 12:22 pm
Published on:
16 Jun 2026 12:20 pm
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