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खबर का असर: 13 साल से चारदीवारी में कैद महेंद्र को इलाज के लिए भेजा जोधपुर, 3 बीघा जमीन बेच चुके मां-बाप की लौटी आस

Sirohi Mahendra Story: पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद सिरोही चिकित्सा विभाग हरकत में आया। सनवाड़ा गांव में 13 साल से मानसिक बीमारी से जूझ रहे महेंद्र राणा को सीएमएचओ दिनेश खराड़ी के निर्देशन में एंबुलेंस से जोधपुर उपचार के लिए भेजा गया। परिवार को अब बेहतर इलाज की उम्मीद जगी है।

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Sirohi Mahendra Mental illness

मानसिक रोग से ग्रसित महेंद्र कुमार (पत्रिका फोटो)

Sirohi Mahendra Mental illness: नागाणी (सिरोही)। राजस्थान पत्रिका में खबर छपने के बाद सिरोही चिकित्सा विभाग तुरंत हरकत में आया। पिछले 13 साल से मानसिक बीमारी के कारण घर की चारदीवारी में कैद सनवाड़ा गांव के महेंद्र राणा को आखिरकार इलाज के लिए जोधपुर भेजा गया है। गरीबी के कारण परिवार महेंद्र का आगे इलाज कराने में असमर्थ था।
बता दें कि परिजन पहले ही महेंद्र के इलाज पर लाखों रुपए खर्च कर चुके थे। लेकिन गरीबी की वजह से बेहतर इलाज रुक गया था। परिवार की इस बेबसी और मानवीय दर्द को राजस्थान पत्रिका ने सोमवार के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था।

खबर सामने आते ही मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी ने मामले को गंभीरता से लिया। उनके निर्देशन में ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी सुमेर सिंह भाटी और सनवाड़ा की मेडिकल टीम तुरंत सक्रिय हुई। विभाग ने तत्परता दिखाते हुए महेंद्र को एंबुलेंस के जरिए बेहतर उपचार के लिए जोधपुर भिजवाया।

चिकित्सा विभाग की इस त्वरित पहल पर महेंद्र के माता-पिता ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि पत्रिका की खबर और प्रशासन की मदद से अब उन्हें अपने बेटे के ठीक होने और सामान्य जीवन जीने की उम्मीद दिखाई दे रही है। इस दौरान मरीज को रवाना करते समय एंबुलेंस पायलट रतनलाल मीणा, कंपाउंडर घेवाराम मेघवाल, पूर्व सरपंच गणपत सिंह देवड़ा और प्रशासक महेंद्र कुमार सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।

गुजरात ले जाकर इलाज करवाया, फिर भी नहीं हुआ ठीक

महेंद्र के पिता रमेश राणा ने बताया कि उसने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वह मजदूरी करने गुजरात चला गया था। वहां अचानक महेंद्र की तबीयत बिगड़ने लगी। नाक से खून आने और खून की उल्टियां होने के बाद वह मानसिक तनाव में रहने लगा। धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई थी।

महेंद्र के पिता ने बताया कि सिरोही और उदयपुर सहित कई स्थानों पर उपचार कराया गया। इलाज पर कई लाख रुपए खर्च हुए। करीब तीन बीघा जमीन भी बेचनी पड़ी, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। आर्थिक हालात कमजोर होने के बाद इलाज बीच में ही रुक गया।

बेटे का दर्द बताते हुए मां हुईं भावुक

महेंद्र की मां सजना देवी बेटे की बीमारी का जिक्र करते ही भावुक हो उठी थीं। उन्होंने बताया, समय पर उचित इलाज नहीं मिलने और आर्थिक तंगी के कारण बेटे की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। अब परिवार लोगों से मदद लेकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहा है।

गुस्से में आ जाता था महेंद्र

महेंद्र कई बार गुस्सा हो जाता था और हमला करने का प्रयास करता था। वह घर के आंगन में दिन-रात एक ही स्थान पर चक्कर लगाता रहता था, जिससे वहां रास्ते जैसा निशान बन गया था।

डर के साये में था परिवार

महेंद्र के दो भाई भी हैं, लेकिन हमले के डर से वे उसके साथ नहीं रह पाते। माता-पिता गुजरात में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। गांव स्थित घर में अब लोग आने से भी कतराते थे।

रेवदर ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमेर सिंह भाटी ने कहा था कि मानसिक रोग से ग्रसित युवक के घर जाकर उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर उपचार की व्यवस्था करवाई जाएगी।