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जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे से किठाना में सन्नाटा: इसी माह गांव आई थी उनकी पत्नी, चर्चा का विषय बनी सुदेश धनखड़ की कही बात

जगदीप धनखड़ के पैतृक गांव किठाना में हर कोई उनके इस्तीफे से हैरान है। गांव के महेंद्र धनखड़ ने उनकी सेहत को लेकर क्या बताया-

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जगदीप धनखड़
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जगदीप धनखड़ ( File Photo-IANS)

सुलताना। देश के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के सोमवार शाम अचानक पद से इस्तीफा देने की खबर से उनके पैतृक गांव किठाना में स्तब्धता और चिंता का माहौल है। गांव की चौपालों से लेकर मंदिरों तक उनके इस्तीफे को लेकर ही चर्चा हो रही है। ग्रामीण जहां इस खबर से मायूस नजर आए, वहीं धनखड़ के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं की गईं।

गांव के आराध्य जोड़िया बालाजी मंदिर में सुबह से ही ग्रामीणों ने दीप जलाकर और नारियल चढ़ाकर धनखड़ की लंबी उम्र की कामना की। मंदिर के पुजारी नरेश कुमार ने बताया कि धनखड़ हर शुभ कार्य की शुरुआत इसी मंदिर में आशीर्वाद लेकर करते हैं। पूरे गांव को उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता है। सुबह से ही मंदिर में ग्रामीणों द्वारा उनके लंबी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर कामना की जा रही है।

दिल्ली से जान रहे हालचाल

गांव की चौपाल पर दिनभर ग्रामीण आपस में चर्चा करते रहे। महेंद्र धनखड़ ने बताया कि मार्च में उनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ था। कुछ समय पहले नैनीताल में भी उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी। अभी स्वास्थ्य कारण के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया है।

ग्रामीण चंद्रभान ने बताया कि इसी महीने जगदीप धनखड़ की पत्नी सुदेश धनखड़ किठाना गांव आई थीं, तीन दिन वह गांव में रुकी और गांव में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। उस दौरान भी वह धनखड़ के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित थी और जल्दी दिल्ली लौटने की बात कह रही थीं। ग्रामीणों ने बताया कि लोग दिल्ली में उनके परिवार से दूरभाष पर हालचाल जान रहे हैं।

विकास का सपना अधूरा नहीं रहेगा

जय सिंह भाटिया ने कहा, धनखड़ ने गांव के लिए जो सपना देखा था, वह आज जमीनी हकीकत बन चुका है। सरकारी कॉलेज, महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, एनएच सर्वे, गोशाला, आयुर्वेदिक अस्पताल जैसी सौगातें उन्हीं के विजन की देन हैं। उन्होंने गांव को जो ऊंचाई दी, वह हमेशा याद रखी जाएगी।