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शिक्षा विभाग के अफसर फौजी की पत्नी को जानबूझकर यूं कर रहे परेशान

पति देश की सुरक्षा के लिए सरहद पर तैनात है। पत्नी अध्यापिका है,लेकन उसकी ड्यूटी घर से दूर लगी हुई। दोनों का बेटा गंभीर बीमारी से पीडि़त है.
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राजकुमार सैनी
गुढ़ागौडज़ी. पति देश की सुरक्षा के लिए सरहद पर तैनात है। पत्नी अध्यापिका है,लेकन उसकी ड्यूटी घर से दूर लगी हुई। दोनों का बेटा गंभीर बीमारी से पीडि़त है,लेकिन शिक्षा विभाग महिला को जानबूझकर घर से दूर लगा रहा है। इतना ही नहीं अपने खास व्यक्ति को पसंद की स्कूल में लगवाने के लिए सरकारी नियमों की पालना भी नहीं कर रहा।


भोड़की गांव की अध्यापिका रीना ने बताया कि शिक्षा निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा बीकानेर के 22 दिसम्बर को जारी विशिष्ट श्रेणी (दृष्टिहीन, दिव्यांग, हृदय रोगी, कैंसर रोगी, किडनी रोगी, विधवा, परित्यक्ता एवं अन्य गंभीर बीमारी) के अध्यापकों के स्थानान्तरण के हुए आदेश के अनुसार उसे राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बुद्धसिंह पंस नीमकाथाना से उसके पुत्र को सेरेब्रल पॉल्सी रोगी होना मानकर राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल जमात पंस उदयपुरवाटी में तृतीय श्रेणी हिन्दी लेवल-2 के रिक्त पर पर स्थानान्तरण किया गया था। लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी प्रारम्भिक शिक्षा झुंझुनूं ने गत 26 दिसम्बर को शिक्षा निदेशक के नाम एक आदेश जारी करके रीना अध्यापिका को हिन्दी लेवल-2 की जगह गलत तरीके से सामाजिक विज्ञान विषय की शिक्षक बताते हुए इस स्कूल में इस विषय का पद रिक्त नहीं होने की बात कहते हुए पदस्थापन आदेश जारी किया जाना संभव नहीं बताते हुए अपनी रिपोर्ट प्रेषित कर दी। जबकि रीना तृतीय श्रेणी अध्यापक लेवल 2 हिन्दी के पद पर कार्यरत है।

शिक्षा निदेशक के स्थानान्तरण के आदेश में यह बात स्पष्ट रूप से उल्लेखित थी, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय प्रारम्भिक शिक्षा ने उसे सामाजिक विज्ञान विषय का अध्यापक बताते गलत रिपोर्ट शिक्षा निदेशक को भेज दी।
काट रही है चक्कर
रीना ने बताया कि उसका पुत्र सेरेब्रल पॉल्सी नामक गंभीर बीमारी से पीडि़त है वह बिना किसी सहारे कुछ भी नहीं कर सकता।
पति देवेन्द्र कुमार भारतीय सेना में वर्तमान में पुणे में कार्यरत होने से घर पर बीमारी पुत्र को संभालने वाला कोई नहीं है। वह एक पखवाड़े से अपने बीमार पुत्र को लेकर डीईओ कार्यालय में कई चक्कर काट चुकी है, लेकिन उसकी फरियाद पर कोई सुनवाई नहीं होने पर उसने सोमवार को शिक्षा निदेशक बीकानेर पहुंचकर इसकी शिकायत की।

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