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Rajasthan: राजस्थान के छोटे से गांव के ‘गुरुजी’ युवाओं को बना रहे फौजी, सेना में पहुंचे इनके 27 ‘शिष्य’

वर्तमान में सूबेदार मायाराम अवाना की पोस्टिंग एनसीटी कोलकाता में है। अवाना ने बताया कि उनका लक्ष्य है की क्षेत्र के अधिक से अधिक युवा भारतीय सेना में जाकर देश सेवा में अपनी सहभागिता निभाएं।

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Subedar Mayaram Awana

खेतड़ी के टीबा निवासी सूबेदार मायाराम अवाना। फोटो- पत्रिका

गुरु केवल ज्ञान के शिक्षक नहीं होते, बल्कि जीवन गढ़ने वाले मार्गदर्शक भी होते हैं। ऐसा ही उदाहरण हैं राजस्थान के झुंझुनूं के खेतड़ी के टीबा गांव निवासी सूबेदार मायाराम अवाना, जो भारतीय सेना की राजपूत रेजीमेंट में कार्यरत हैं। जब भी वे छुट्टी पर गांव आते हैं, तो समय बिताने की बजाय गांव के युवाओं को फौज में भर्ती होने का सपना पूरा करने में जुट जाते हैं।

टीबा स्थित शहीद श्योराम गुर्जर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के मैदान में वे युवाओं को रोज सुबह दौड़, शारीरिक अभ्यास और भर्ती से जुड़ी जरूरी तैयारियों का प्रशिक्षण देते हैं। गांव के युवा उन्हें समान से 'गुरुजी' कहकर बुलाते हैं। पिछले दस वर्षों में उनकी मेहनत रंग लाई है।

टीबा, बसई और आसपास के गांवों से अब तक 27 युवा सेना और अर्द्धसैनिक बलों में चयनित हो चुके हैं। वे अब देश सेवा कर रहे हैं और इस सफलता का श्रेय सूबेदार मायाराम को देते हैं। वर्तमान में सूबेदार मायाराम अवाना की पोस्टिंग एनसीटी कोलकाता में है। अवाना ने बताया कि उनका लक्ष्य है की क्षेत्र के अधिक से अधिक युवा भारतीय सेना में जाकर देश सेवा में अपनी सहभागिता निभाएं।

500 से ज्यादा खिलाड़ियों को तराशा

वहीं जयसिंह धनखड़, जो चिड़ावा के पीएमश्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, देवरोड में शारीरिक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने न सिर्फ शिक्षा दी, बल्कि गांव के युवाओं को खेलों के माध्यम से नई उड़ान दी। 27 वर्षों के सेवाकाल में धनखड़ अब तक 500 से अधिक खिलाड़ियों को तैयार कर चुके हैं। इनमें से 300 से ज्यादा खिलाड़ी सरकारी नौकरियों में चयनित हो चुके हैं, जबकि कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं। तनुश्री धनखड़, बंटी और जतिन जैसे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देवरोड का नाम रोशन कर चुके हैं।

प्रेरणा से बना नया स्टेडियम

धनखड़ से प्रेरित होकर बतावरपुरा में भामाशाहों की ओर से करीब एक करोड़ की लागत में अत्याधुनिक स्टेडियम का निर्माण भी करवाया जा रहा है। स्टेडियम में खिलाड़ियों को न सिर्फ खेलों की ट्रेनिंग दी जाती है, बल्कि सेना भर्ती व अन्य फिजिकल परीक्षाओं की भी निशुल्क तैयारी करवाई जाती है। यही कारण है कि आस-पास के गांवों के युवा भी यहां किराए पर रहकर तैयारी कर रहे हैं।

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मिट्टी का टीला बना स्टेडियम

धनखड़ ने पहले किशोरपुरा और फिर देवरोड में पदस्थापना के दौरान खुद खेल मैदान को स्तर देकर अत्याधुनिक रूप दिया। देवरोड स्टेडियम कभी मिट्टी के ढेर से घिरा रहता था, जिसे उन्होंने स्वयं के प्रयासों से समतल कर स्टेडियम में तब्दील किया। आज वही मैदान खिलाड़ियों का कॅरिअर लॉन्चपैड बन चुका है।

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