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Success Story : ट्रैजडी से विक्ट्री तक! कम उम्र में सिर से उठा माता-पिता का साया, फिर भी नहीं हारी हिम्मत और बन गए अधिकारी

सोनू ने बताया कि वह समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। पद पर रहते हुए स्वच्छता आदि पर विशेष कार्य करने के साथ-साथ विकलांगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य भी किया जाएगा।

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किशोरी लाल
Rajasthan latest News : अलसीसर. कहते हैं कि व्यक्ति का कद ऊंचाई से नहीं बल्कि क्षमताओं से तय होता है। यह सार्थक कर रहे हैं ग्राम पंचायत कंकडेऊ कलां के ग्राम विकास अधिकारी सोनू सेन। मात्र तीन फीट आठ इंच की हाइट के कारण सोनू को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कम उम्र में ही माता-पिता का देहांत हो गया लेकिन दृढ़ता के साथ आगे बढ़े और लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गए। सोनू की उम्र 28 साल है। वह जब दस साल के थे, तब पिता का निधन हो गया और 16 साल की उम्र में मां की कैंसर से मृत्यु हो गई। इससे दो बहनों की जिमेदारी भी सोनू पर आ गई। सोनू उस वक्त 11वीं अध्ययनरत थे लेकिन ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी हिमत नहीं हारी और एक चाय की दुकान पर नौकरी करने लगे।

करीब दो साल तक उन्होंने चाय की दुकान पर नौकरी की। बाद में उन्हें अपने मामा-मामी का सहारा मिला। उनकी मदद से वह कॉलेज टॉपर रहे। सरकारी नौकरी पाने के लिए सोनू ने रोज आठ घंटे की पढ़ाई की। सोनू को ग्रामी विकास अधिकारी के रूप में पहली पोस्टिंग 12 अप्रेल 2023 को बाड़मेर जिले में मिली। वर्तमान में वह झुंझुनूं जिले के कंकडेऊ कलां में कार्यरत हैं। पद की जिमेदारी संभालने के साथ-साथ सोनू आरएएस की तैयारी भी कर रहे हैं।

Rajasthan Samachar :बैकबेंचर था लेकिन आगे खड़ा किया जाता
सोनू ने बताया कि जब मेरे हमउम्र साथी मुझसे लंबे होते जा रहे थे, तब मजाक का लेवल भी बढ़ रहा था। ऐसे में लंबे दोस्तों के साथ चलने, खड़े होने में भी शर्म आने लगी थी। मैं दिल से बैकबेंचर हूं, लेकिन कम हाइट की वजह से स्कूल में प्रेयर के दौरान लाइन में सबसे आगे खड़ा कर दिया जाता था। लेकिन सभी परिस्थितियों का सामना करता रहा, उसी वजह से सफलता मिली है।

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समाज के लिए कुछ करने का संकल्प
सोनू ने बताया कि वह समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं। पद पर रहते हुए स्वच्छता आदि पर विशेष कार्य करने के साथ-साथ विकलांगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का कार्य भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिव्यांग योग्यता से परिपूर्ण हैं, बस उन्हें केवल सही मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और प्रेरणा की जरूरत होती है।