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विदेश की नौकरी छोड़ झुंझुनूं के लोकेश ने अपनाई बागवानी, लाखों में कमाई

Thai Apple Ber : पारम्परिक खेती छोडकर बागवानी खेती की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। गांव कांट के लोकेश कुमार पुत्र दारा सिंह नैण ने दोहा कतर से नौकरी छोड़ कर वर्ष 2018 में पारम्परिक खेती के साथ जैविक आधार उद्यानिकी खेती शुरू की।

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अलसीसर (झुंझुनूं)। पारम्परिक खेती छोडकर बागवानी खेती की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। गांव कांट के लोकेश कुमार पुत्र दारा सिंह नैण ने दोहा कतर से नौकरी छोड़ कर वर्ष 2018 में पारम्परिक खेती के साथ जैविक आधार उद्यानिकी खेती शुरू की। अब वह हर साल लाखों रुपए कमा रहा है। लोकेश ने बताया कि शुरू में उसने थाई ऐप्पल बेर, कश्मीरी ऐप्पल बेर, अमरूद, चीकू, सांगरी वाली बीकानेरी खेजड़ी व जोजोबा का बगीचा लगाया था।

बागवानी में नवाचार अपनाकर थाई एप्पल बेर की खेती कर लगभग 250 पौधे, 40 पौधे कश्मीरी ऐप्पल बेर, 15 पौधा चीकू,10 पौधा अमरूद, 80 पौधा खेजडी के लगाकर बाग तैयार किया है। किसान ने बताया कि गेहूं की खेती में लागत अधिक और मुनाफा कम मिलता था। अब बेर की खेती करके हर साल करीब एक से डेढ़ लाख रुपए की आमदनी ले रहे हैं।

खुद खरीदने आते हैं
बेर अच्छी किस्म व मीठे होने के कारण व्यापारी व आमजन बाग से ही लेने आ जाते हैं। बेचने के लिए मण्डी में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। किसान एप्पल बेर की खेती करने के साथ पौधे लगाने की विधि भी अच्छे तरीके से जानते हैं। अब किसानों को बेर की खेती की जानकारी देकर कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बता रहे हैं। बेर की खेती करके अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।

खेती में किए गए नवाचार को देखकर आस-पास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। बेर के पौधों में पानी की कम आवश्यकता होती है। बेर का प्रत्येक पौधा बीस फिट की दूरी पर लगाया गया है। इससे बेर का पौधा अच्छे तरीके से फैलाव ले सकता है। बेर की खेती में जैविक खाद का उपयोग किया जाता है ।

पाळे से होता नुकसान
किसान लोकेश ने बताया कि वर्ष 2020 व 21 में अच्छी ग्रोथ हुई। 2022 में फल बहुत शानदार लगे थे। लेकिन जनवरी माह में पाळा पड़ने के कारण थोड़ा नुकसान हो गया । बेर में सबसे ज्यादा नुकसान केवल पाळे से ही होता है। इसके अलावा कभी तोते भी नुकसान पहुंचा देते हैं। शेष यह फसल झुंझुनूं जिले के लिए शानदार है।