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दो भाई एक साथ बने IAS, बेटों की पढ़ाई के लिए मां रातभर जागकर कढ़ाई करती तो पिता करते सिलाई, ऐसी है संघर्ष भरी कहानी

यूपीएससी की ओर से घोषित परिणाम में उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने 443वीं और छोटे बेटे अमित कुमावत ने 600वीं रैंक हासिल की है।

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यूपीएससी की ओर से घोषित परिणाम में उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने 443वीं और छोटे बेटे अमित कुमावत ने 600वीं रैंक हासिल की है।

दो भाई एक साथ बने IAS, बेटों की पढ़ाई के लिए मां रातभर जागकर कढ़ाई करती तो पिता करते सिलाई, ऐसी है संघर्ष भरी कहानी

झुंझुनूं।
सकारात्मक सोच के साथ यह दास्तां सपने, संकल्प और संस्कारों से जुड़ी है। सपना था अभावों से जूझते माता- पिता का और संकल्प था संस्कारों में पले उन दो बेटों का जिनके जीने का ही एकमात्र लक्ष्य माता- पिता के उन सपनों को ही पूरा करना था। सपने से बने उस संकल्प को साकार करने के लिए पिता जहां रात रातभर जागकर सिलाई करते, तो मां भी नींद भुलाकर कढ़ाई में साथ देती। इस सिलाई और कढ़ाई के बीच ही होती उन बेटों की पढ़ाई भी जिनकी किताबों का इंतजाम माता पिता के उस रात दिन की मेहतन से ही मयस्सर था। लेकिन, अभाव और संघर्ष के दौर में भी उस परिवार ने हौंसले को हमकदम रखा और आखिरकार वही हुआ, जो संस्कारों में पले संकल्प का होता है। दोनों बेटों ने एकसाथ IAS की परीक्षा पास कर ली और उन आंखों को ही खुशी से छलका दिया जिसमें कभी उन बेटों को बड़ा बनने का सपना था। जी, हां हम बात कर रहे शहर के मोदी रोड पर रहने वाले सुभाष कुमावत के दो बेटों की। उनके बेटों का सिविल सर्विसेज में चयन हुआ है। UPSC की ओर से घोषित परिणाम में उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने 443वीं और छोटे बेटे अमित कुमावत ने 600वीं रैंक हासिल की है। जिसके बाद से ही उनके घर में बधाइयों को तांता लगा गया और हो भी क्यों ना आखिर बेटों ने अपने माता पिता का बरसों से देखते आ रहे सपने को पूरा जो किया है। सुभाष कुमावत सिलाई का काम करते हैं और माता राजेश्वरी देवी बंधेज का काम करती है। उनके बड़े बेटे पंकज कुमावत ने आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल में बीटेक किया और छोटे भाई अमित ने भी IIT DELHI से B.Tech किया। दोनों भाइयों का एक ही संकल्प था कि देश की इस सबसे बड़ी परीक्षा में सफल होकर अपने माता-पिता के सपने को पूरा करना है। आज दोनों ने वह सपना एक साथ पूरा कर दिखाया तो माता-पिता खुशी के आंसू नहीं रोक पा रहे।

इतनी आसान नहीं थी राह
पंकज व अमित का कहना है कि उनकी पढ़ाई की राह इतनी आसान नहीं थी। हमारी फीस, किताबों और ऐसी दूसरी चीजों का इंतजाम कैसे करते थे। इस बात को हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं। इसका संघर्ष तो उन्होंने ही किया। घर पर हम चार भाई बहनों को पढ़ाने के लिए पापा रातभर सिलाई व मां तुरपाई करती। वे हमेशा बड़ा आदमी बनने का सपने देखते और हमें हिम्मत देते।