देेश के 2700 आयुर्वेद शिक्षकों पर 10 साल का प्रतिबंध

Ayurveda University Jodhpur

- एक से अधिक संस्थान में कागजों में पढ़ाते थे
-एलपीजी एड्रेस, राशन कार्ड व बिजली बिल मांगने सहित 12 सबूत मांगने से आए पकड़ में
- राजस्थान के 50 से अधिक शिक्षक शामिल

By: Gajendrasingh Dahiya

Updated: 14 Jan 2021, 08:06 PM IST

गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. केंद्रीय भारतीय चिकित्सा परिषद (सीसीआईएम) नई दिल्ली ने देशभर में 2700 से अधिक आयुर्वेद शिक्षकों पर 10 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। अब ये शिक्षक किसी भी आयुर्वेद कॉलेज में पढ़ा नहीं सकेंगे। इसमें राजस्थान के करीब 50 शिक्षक शामिल हैं। ये सभी शिक्षक एक से अधिक कॉलेजों में कागजों में अध्ययनरत थे। हालांकि सीसीआईएम में इन शिक्षकों की अभी सुनवाई भी चल रही है।

देश भर में आयुर्वेद के करीब 400 कॉलेज है। इसमें 90 कर्नाटक, महाराष्ट्र में 65, उत्तरप्रदेश में 67 और राजस्थान में 11 हैं। हर साल सीसीआईएम की ओर से कॉलेजों को निरीक्षण कर उनको मान्यता दी जाती है। लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिल रही थी कि निरीक्षण के समय ही कई शिक्षक कॉलेज में उपस्थित रहते हैं और साल भर के लिए गायब हो जाते हैं।

शिक्षकों से 12 सबूत मांगे, आखिर घुटने टेके
सीसीआईएम ने राज्यों व कॉलेजों से आयुर्वेद शिक्षकों के प्रेक्टिसिंग एड्रेस लिए। कई शिक्षकों के एक से अधिक राज्यों में कॉलेजों में शिक्षण का पता चला। उनके एफिडेविट पर स्वयं और संबंधित कॉलेज के प्राचार्य और प्रबंधन ने झूठे हस्ताक्षर किए थे। शिक्षकों द्वारा बहाने बनाने व ना नुकर करने पर सीसीआईएम ने उनसे संबंधित कॉलेज के शहर में एलपीजी एड्रेस, बिजली का बिल, स्थानीय बैंक में खाता, एटीएम से ट्रांजेक्शन, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नम्बर, बच्चों के स्कूल की दाखिले की रसीद, ड्राईविंग लाइसेंस सहित 12 तरह के दस्तावेज मांगे। ऑनलाइन सुनवाई हुई। इसमें अधिकांश शिक्षक फेल हो गए और पकड़े गए।

60 सीट के लिए चाहिए 30 शिक्षक
आयुर्वेद कॉलेज में 60 सीट पर स्नातक पाठ्यक्रम के लिए 30 शिक्षकों की अनिवार्यता है। इसकी भर्ती पूर्ति के लिए अधिकांश निजी कॉलेज शिक्षकों को फाइलों में ही दिखाते हैं। देश भर में करीब 20 हजार आयुर्वेद शिक्षक है।
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‘ऐसे करीब 2700 आयुर्वेद शिक्षक हैं जो एक से अधिक संस्थानों में फाइलों में पढ़ाते थे। हमने तो 10 साल का प्रतिबंध लगाया है लेकिन केंद्रीय आयुष मंत्रालय में इसको लेकर विचार विमर्श किया जा रहा है।’
डॉ जयंत देव पूजारी, अध्यक्ष, सीसीआईएम नई दिल्ली

Gajendrasingh Dahiya Reporting
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