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RAILWAY–उत्तर पश्चिम रेलवे में 2190 किमी ट्रेक हुआ विद्युतीकृत

- इस वर्ष जोधपुर मण्डल में मारवाड़-लूणी रेलमार्ग किया जाएगा विद्युतीकृत - 2023 तक पूरे जोन का विद्युतीकृत करने का लक्ष्य
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जोधपुर

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Amit Dave

Jun 08, 2021

RAILWAY--उत्तर पश्चिम रेलवे में 2190 किमी ट्रेक हुआ विद्युतीकृत

RAILWAY--उत्तर पश्चिम रेलवे में 2190 किमी ट्रेक हुआ विद्युतीकृत

जोधपुर।

रेलवे ने कोविड-19 की विषम परिस्थितियों में अपने आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने का कार्य जारी रखा। इस कड़ी में रेलवे ने पर्यावरण अनुकूल रेल संचालन के लिए विद्युतीकरण का कार्य किया। उत्तर पश्चिम रेलवे में अब तक 2190 किलोमीटर रेल लाइन पर विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो गया है। उत्तर पष्चिम रेलवे पर विद्युतीकरण का कार्य वर्ष 2014 के बाद शुरू हुआ था। इससे पहले इस जोन में विद्युतीकरण शून्य था। जबबि देश में वर्ष 2020-21 में 6015 रूट किलोमीटर ब्रॉडगेज लाइनों का विद्युतीकरण किया गया, जो अभी तक का सर्वाधिक है।

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जोधपुर मण्डल में मारवाड़-लूणी-जोधपुर मार्ग होगा विद्युतीकृत

उत्तर पश्चिम रेलवे में वर्ष 2021-22 में करीब 980 किलोमीटर ब्रॉडगेज लाइनों को विद्युतीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें जोधपुर मण्डल के मारवाड़-लूणी-जोधपुर शामिल है। इसके अलावा रींगस-सीकर-चुरू, सीकर-लोहारू, चूरू-रतनगढ-लालगढ, सूरतगढ-लालगढ, ब्यावर-गुडिया व मदार-पुष्कर रेलमार्ग विद्युतीकृत किया जाएगा। जबकि वर्ष 2020-21 में 385 किलोमीटर रेलखण्ड के विद्युतीकरण का कार्य किया गया था।

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दिसम्बर 2023 तक सभी रेलमार्गो को विद्युतीकरण का लक्ष्य

उत्तर पश्चिम रेलवे के उपहाप्रबंधक (सामान्य) व मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी लेफ्टिनेंट शशिकिरण के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे पर विद्युतीकरण के कार्य को विगत वर्षों के बजट में प्राथमिकता दी गई है व सम्पूर्ण जोन पर विद्युतीकरण का कार्य स्वीकृत हो गया है। उत्तर पश्चिम रेलवे पर 3154 रूट किलोमीटर रेलमार्ग के विद्युतीकरण करीब 2,584 करोड़ रुपए की लागत के साथ किया जा रहा है तथा सभी रेलमार्गों का विद्युतीकरण का कार्य दिसम्बर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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विद्युतीकरण के फायदे

- पर्यावरण अनुकूल परिवहन साधन

- डीजल इंजन के धुएं से होने वाले प्रदुषण से मुक्ति

- ईंधन आयात पर निर्भरता में कमी होने से राजस्व में बचत

- संचालन लागत में कमी- विद्युत इंजनों की लोड क्षमता अधिक होने के कारण अधिक भार, लम्बी ट्रेनों व अधिक ट्रेनों का संचालन संभव

- डीजल की अपेक्षा बिजली की लागत कम होने से राजस्व की बचत