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जिले की 2500 स्टोन इकाईयां बंद होने के कगार पर

खान से निकलने वाले पत्थर के ब्लॉक्स को सरकार ने अनड्रेस्ड की श्रेणी से हटाया, अब रॉयल्टी ठेकेदार वसूल रहे ड्रेस्ड कैटेगरी की रॉयल्टी

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जिले की 2500 स्टोन इकाईयां बंद होने के कगार पर

जिले की 2500 स्टोन इकाईयां बंद होने के कगार पर

मंडोर. मंडोर के स्टोन पार्क की करीब 45 से अधिक फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर है। सरकार के नए नोटिफि केशन में खान से निकलने वाले पत्थर के ब्लॉक्स को अनड्रेस्ड की श्रेणी से हटाने के बाद इस पर ढाई गुणा रॉयल्टी बढ़ गई हैं। इसके चलते जहां अवैध स्टोन व्यापारियों एवं रॉयल्टी ठेकेदारों को फायदा हो रहा हैं, वहीं सरकार की नीति-नियमों के अनुरूप कार्य कर रहे व्यापारी नुकसान झेल रहे हैं। स्टोन पार्क के सभी उद्यमियों ने पिछले 15 दिनों से स्टोन ब्लॉक्स उठाना बंद कर दिया हैं। बढ़ी रॉयल्टी से स्टोन व्यापारियों को लाखों का घाटा झेलना पड़ रहा है।


सरकार के आदेश ने डाला परेशानी में

वर्ष 2012 से ड्रेस्ड ( फि नीश पत्थर) पर 240 रुपए और अनड्रेस्ड पत्थर (बिना फि निशिंग पत्थर ) पर 100 रुपए रॉयल्टी ली जा रही थी। फि लहाल दो श्रेणी बनी हुई हैं, लेकिन 28 फ रवरी 2017 और 27 अक्टूबर 2017 के नोटिफि केशन में सरकार ने अनड्रेस्ड कैटेगरी में से ब्लॉक शब्द हटा दिया है। अब रॉयल्टी ठेकेदार इसी नोटिफि केशन की आड़ में स्टोन उद्यमियों से ढाई गुणा रॉयल्टी वसूल रहे हैं।

अवैध इकाइयों को फायदा
नोटिफि केशन से अवैध इकाइयों और रॉयल्टी ठेकेदारों को फायदा पहुंच रहा है। ऐसी इकाईयां जो माइन्स क्षेत्र में चल रही हैं, वे ब्लॉक्स को पट्टी में परिवर्तित कर अथवा फि निशिंग कर अपना माल बेच रहे हैं। इन्हें कच्चे माल यानी ब्लॉक्स पर अधिक रॉयल्टी नहीं देनी पड़ रही, जबकि माइन्स क्षेत्र में कटर मशीन लगाने की इजाजत किसी स्टोन इकाई के पास नहीं है। ऐसे में जो उद्यमी स्टोन पार्क में करोड़ों की जमीन खरीद यहां करोड़ों का निवेश कर बैठे हैं। उन्हें कच्चा माल यानी ब्लॉक्स को ढाई गुणा रॉयल्टी देकर खरीदना पड़ रहा है।


लाखों का नुकसान

अनड्रेस्ड यानि बिना फि नीश किए पत्थर पर पहले जहां रॉयल्टी 100 रुपए थी, अब 240 रुपए वसूली जा रही है। एक स्टोन व्यापारी प्रतिदिन यदि एक ट्रक यानि 30 टन कच्चा माल उठाता हैं, तो उसे 4200 रुपए रॉयल्टी के रूप में ज्यादा देने होंगे। यानी महीने के करीब सवा लाख रूपए का नुकसान एक स्टोन व्यापारी को झेलना पड़ रहा है।


ढाई हजार से अधिक इकाईयां प्रभावित
जोधपुर और आसपास सहित करीब ढाई हजार से अधिक स्टोन इण्डस्ट्रीज यानि स्टोन कटर मशीन की फैक्ट्रियां हैं। इनमें ओसियां, बालोतरा, पचपदरा, नागौर, सिणधरी, बायतू, बिलाड़ा, जैतारण, पीपाड़, बोरून्दा, मेड़ता, सोजत, पाली सहित कई जगह स्टोन के ब्लॉक्स जोधपुर से ही जाते हैं। इसके चलते करीब ढाई हजार से अधिक इकाईयां और इनसे जुड़े कामगारों पर रोजगार का संकट पैदा हो गया है।

इनका कहना है

सरकार के नए नोटिफि केशन से स्टोन उद्यमियों पर रॉयल्टी की ढाई गुणा मार पड़ रही है। व्यापारियों ने ब्लॉक्स मंगवाना बंद कर दिया है। वे व्यापारी जिनके पास ब्लॉक्स का पुराना स्टॉक्स है। वे ही काम कर रहे हैं। जल्द ही समाधान नहीं हुआ तो स्टोन इकाईयों पर ताला लग जाएगा।

नरेश कच्छवाहा, अध्यक्ष, जोधपुर स्टोन पार्क इंडस्ट्रीज एसोसिएशन