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400 सरकारी क्वार्टर खाली पड़े रहने की सच्चाई जान चौंक जाएंगे आप

मान ना मान ये हैं 'सरकारी' मकान, योजना में रहते है मात्र 8 परिवार

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400 सरकारी क्वार्टर खाली पड़े रहने की सच्चाई जान चौंक जाएंगे आप

400 सरकारी क्वार्टर खाली पड़े रहने की सच्चाई जान चौंक जाएंगे आप


सुविधाएं न होने के कारण जर्जर हो गए 400 क्वार्टर ...फोटो

जोधपुर/मंडोर. बासनी तम्बोलिया में यूआईटी की ओर से 15 साल पहले बनाई गई आवासीय योजना बदहाल है। करीब चार सौ क्वार्टर की इस योजना के तहत पिछले 20 बरसों के दौरान नाम मात्र के मकान ही आवंटित हो पाए हैं। बाकी खण्डहर में तब्दील हो चुके हैं। सरकारी नुमाइंदों ने यह योजना कभी आगे विकसित करने की जरूरत तक नहीं समझी।


चार सौ मकानो पर उदासीनता की गर्द

तत्कालीन नगर सुधार न्यास ने 15 साल पहले स्वच्छकार योजना के तहत 21 जुलाई 2003 को आंगणवा बासनी तम्बोलिया में दीनदयाल उपाध्यायनगर आवासीय कॉलोनी विकसित की थी। कॉलोनी का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत , मानसिंह देवड़ा, जुगल काबरा व भंवर बलाई ने उद्घाटन किया था। इस कॉलानी में आठ सौ वर्ग फ ीट में साढ़े तीन सौ और अस्सी वर्ग फ ीट के कुल चार सौ क्वार्टर बनाए गए थे। शहर से कोसों दूर और मूलभूत सुविधाएं न होने की वजह इस कॉलोनी में आने के प्रति भी लोगों ने रुचि नहीं दिखाई। बाद में धीरे-धीरे आसपास की इंडस्ट्रीज में काम करने वाले लोगों ने अपना कब्जा जमाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते कुछ ही समय में यह कॉलोनी अतिक्रमणकारियों की भेंट चढ़ गई। बाद में इसे पुलिस हस्तक्षेप से खाली करवाना पड़ा। एक सप्ताह पहले भी कुछ लोग ऑटो रिक्शा में सामान लेकर कब्जा करने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें भी पुलिस ने समझाइश कर हटाया।

जर्जर हालत में मकान
वर्षों से कोई सुध नहीं लेने के कारण अब यह बस्ती जर्जर हालत में है। अत्यधिक जीर्णशीर्ण हालत वाले मकानों में अतिक्रमण कर यहां रहने वाले भी मकान खाली कर छोड़ चुके हैं। कई मकानों में से कई के तो लोग दरवाजे, खिड़कियां और सीमेंट की जालियां तक लोग तोड़ कर ले जा चुके हैं। इनमें से कुछ मकान गाडोलिया लोहारों को सस्ती दर पर आवंटित करने की योजना भी फाइलों में धरी रह गई।

क्षेत्रवासियों का कहना है

दरअसल यूआईटी ने वर्ष 2003 में जरूरतमंद लोगों के बजाय ये क्वार्टर प्रभावशाली लोगों को आवंटित कर दिए थे। जरूरतमंद लोगों ने यहां बसना स्वीकार ही नहीं किया। इन क्वार्टरों पर कई बार कब्जे होते रहे और पुलिस खाली करवाती रही है। यहंा मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
लक्ष्मण सोलंकी, क्षेत्रवासी

सभी क्वार्टर जर्जर हो चुके हैं

सभी क्वार्टर पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। एक भी रहने लायक नहीं है। सीवरेज लाइनें जाम हो चुकी हैं। रोड लाइटों का कनेक्शन तक नहीं हुआ है। यहां आवागमन की कोई सुविधा नहीं है। यह जगह रात्रि के समय शराबियों का अड्डा बन जाती है।
सायरचंद

पूरे परिवार सहित रहता हूं
यहीं पर इन क्वार्टर में पूरे परिवार सहित रहता हूं। कोई सुविधा नहीं है। रात्रि के समय अंधेरा रहता है। सड़कें जर्जर हैं। रोड लाइटों का कनेक्शन तक नहीं हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से किसी परिवार का रहना मुश्किल है।

गोपालराम विश्नोई