11 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

नवीनीकरण नहीं होने से राज्य की 5 हजार लाइसेंसशुदा आरा मशीनें हो गई अवैध!

खानापूर्ति की बनी कमेटी, सवा साल से एक भी बैठक नहीं
2 min read
Google source verification
saw machines in jodhpur

नवीनीकरण नहीं होने से राज्य की 5 हजार लाइसेंसशुदा आरा मशीनें हो गई अवैध!

अमित दवे/जोधपुर. प्रदेश में लकड़ी आधारित हस्तशिल्प उद्योग में उपयोग में ली जा रही करीब 5 हजार छोटी आरा मशीनें अवैध संचालित हो रही है। इसकी मुख्य वजह छोटी आरा मशीनों के लाइसेंस नवीनीकरण में देरी है। नवीनीकरण नहीं होने से आरा मशीनें अवैध रूप से ही संचालित हो रही हैं। जिले के हस्तशिल्प उद्यमियों के आरा मशीनों के लाइसेंस के नवीनीकरण की फ ाइलें पिछले करीब 3 साल से जिला वन अधिकरी के कार्यालय में अटकी पड़ी हैं।

जोधपुर के हस्तशिल्प उद्यमियों ने बताया कि सरकार की ओर से 5 वर्षो के लिए आरा मशीन का लाइसेंस दिया जाता है, यहां के करीब 90 प्रतिशत इकाइयों के लाइसेंस की अवधि वर्ष 2017 में समाप्त हो गई थी। जोधपुर सहित प्रदेश से आरा मशीनों के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए वर्ष 2017 में फ ीस सहित सभी दस्तावेज जमा कराए गए थे। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में पिछले 5 वर्षों में एक भी नया लाइसेंस जारी नहीं किया गया है ।

कमेटी गठित, आज तक बैठक नहीं हुई

जनवरी 2018 में आरा मशीन के लाइसेंस बनाने के लिए नई कमेटी का गठन किया गया था, यह भी खानापूर्ति ही थी। इसमे गैर सरकरी सदस्यों के तौर पर जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ.भरत दिनेश को चेयरमैन पद पर नियुक्त किया गया था। इस कमेटी की एक भी बैठक का आयोजन अभी तक नही किया गया है।

24 इंच की आरा मशीन की ही अनुमति

देश में वृक्षों की लकड़ी की अंधाधुंध कटाई को देखते हुए वर्ष 2003 में आरा मशीनों के उपयोग पर बैन लग गया था। वर्ष 2005-06 में बैन हटा। उस समय यह तय किया गया था, लकड़़ी आधारित हैण्डीक्राफ्ट क्षेत्र में 24 इंच की आरा मशीन का लकड़ी काटने के लिए उपयोग किया जा सकता है। वन विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, आरा मशीन का लाइसेंस उसी को दिया जाएगा, जो किसी हैण्डीक्राफ्ट या औद्योगिक संगठन के सदस्य हो। तब से अब तक हैण्डीक्राफ्ट सहित अन्य क्षेत्रों में 24 इंच की ही आरा मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।


इनका कहना है

इस मामले की पूरी जानकारी लेकर पता करवाता हूं।
प्रियरंजन, मुख्य वन संरक्षक, जोधपुर

आरा मशीन का लाइसेंस नहीं होने से असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है । शीशम के उत्पाद निर्यात करने हुए साईटस एनओसी के लिए अपेक्षित दस्तावेजों में एक आरा मशीन का लाइसेंस भी होता है। इसके नहीं होने से चैनल डोक्युमेंट में कमी रहती है । यहां के निर्यातकों को दूसरे राज्य के सप्लायर व टिम्बर मर्चेन्ट का लाइसेंस लेकर देना पड़ रहा है ।
डॉ भरत दिनेश, अध्यक्ष, जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

23 फ रवरी 2017 में आरा मशीन के लाइसेंस नवीनीकरण के लिए फ ाइल शुल्क सहित जिला वन अधिकारी के कार्यालय में जमा करवाई थी। परन्तु अभी तक लाइसेंस नवीनीकृत नहीं किया गया है। विभाग के कई चक्कर काटे, लेकिन काम नहीं हुआ।

हरीश हासवानी, निर्यातक