
60 years ago even the milk used in the government schools
-सरकार ने परम्परा को फिर कियाा शुरू
-कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को राजकीय विद्यालयों में पिलाया जाएगा सप्ताह में तीन दिन दूध
जोधपुर.
लगभग 60 साल पूर्व भी बच्चों को प्रदेश की सरकारी स्कूलों में दूध पिलाने की परम्परा थीं। उस समय विद्यालयों में पोषाहार की जगह मक्की के आटे के बड़े सोयाबिन के तेल में तलकर दिए जाते थे। साथ ही पाउडर का दूध बच्चों को पिलाया जाता था।
इस परम्परा का निर्वहन सोमवार से शिक्षा विभाग एक बार फिर से करने जा रहा है। जोधपुर जिले की सवा तीन हजार सरकारी स्कूलों में सोमवार से बच्चों को दूध पिलाया जाएगा। जोधपुर शहर के कुड़ी भगतासनी सेंट्रल एकेडमी स्कूल के सामने राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गांधी स्ट्रीट में सुबह 8 बजे अन्नपूर्णा दूध योजना का शुभारंभ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि व शिक्षाधिकारी मौजूद रहेंगे। डीईओ प्रारंभिक प्रथम धर्मेन्द्र कुमार जोशी ने बताया कि इस संबंध में सभी विद्यालयों को निर्देशित किया जा चुका है। विद्यालय में दूध गर्म करने की जिम्मेदारी कुक कम हैल्पर की रहेगी। जो भी कमियां शेष है, उनमें सुधार लाया जाएगा।
इधर शिक्षकों को योजना से मुक्त रखने की मांग
राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ ने अन्नपूर्णा दूध योजना की तारीफ की है, लेकिन उन्होंने योजना से शिक्षकों को मुक्त रखने की मांग की है। जिलामंत्री संतोकसिंह सिनली ने बताया कि रविवार को बैठक पावटा स्थित महासंघ कार्यालय में हुई। प्रदेश महामंत्री शम्भूसिंह मेड़तिया ने कहा कि हमारा विरोध योजना को लागू करने के तौर तरीके और अन्य समस्याओं को लेकर हैं। योजना से शिक्षकों को मुक्त रखा जाए, ताकि शिक्षण कार्य बाधित न हो। प्रभावी संचालन के लिए एजेंसी को ठेका दिया जाए। बर्तन खरीदने के लिए दी गई राशि अपर्याप्त है। राशि नहीं बढ़ाई तो संघ हड़ताल करेगा। इस अवसर पर प्रदेश संयुक्त मंत्री भंवराराम जाखड़, प्रदेश महिला संयोजक बेबी नंदा व जिलाध्यक्ष लक्ष्मणदान चारण सहित कई शिक्षक नेता मौजूद थे।
Published on:
02 Jul 2018 04:25 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
