अभियोजन ने जोधपुर स्थित राजस्थान फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (आरएफएसएल) की आधिकारिक जांच रिपोर्ट के बारे में कोर्ट को अवगत करवाया। रिपोर्ट में लिखा है कि हिरणों की मौत जहर या अन्य कारणों से नहीं, बल्कि फायरिंग से हुई थी। अभियोजन ने बचाव पक्ष के द्वारा बोड़ा से पूर्व में की गई उस जिरह पर भी बहस की, जिसमें हिरणों के अवशेष की जांच डीएनए एक्सपर्ट से नहीं करवाने सम्बन्धी संशय जताया गया था। इस सम्बन्ध में अभियोजन ने न्यायाधीश देवकुमार खत्री को आरएफएसएल के द्वारा दिए गए पत्र के बारे में अवगत करवाया, जिसमें यह लिखा गया है कि जांच अधिकारी ने डीएनए टेस्ट के लिए सैम्पल भेजे थे, लेकिन यह सुविधा नहीं होने से टेस्ट यहां नहीं हो सके। जांच अधिकारी ने बाद में डीएनए टेस्ट के लिए सैम्पल हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला में भेजकर रिपोर्ट मंगवाई थी। उस रिपोर्ट में भी हिरणों का शिकार होने की बात बताई गई है। दो घंटे चली बहस आज भी अधूरी रही। बुधवार को फिर इसी मामलें की सुनवाई होगी । बहस के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत, केके व्यास, मनीष सिसोदिया न्यायालय में उपस्थित थे।