
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में फंसे बासनी के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक संजय बोथरा को कोई अंतरिम राहत नहीं दी। एसीबी से बचने के लिए निरीक्षक बोथरा लम्बे समय से हैं मेडिकल लीव पर चल रहे है। बोथरा ने आपराधिक विविध याचिका दायर करते हुए कोर्ट में एसीबी में दर्ज एफआईआर निरस्त करने की गुहार लगाई थी। कोर्ट ने एसीबी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।
SEE MORE: सीएम गहलोत की फटकार से फील्ड में निकले डिस्कॉम अधिकारी
अवकाशकालीन न्यायाधीश डा.पुष्पेंद्रसिंह भाटी की एकलपीठ में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता धीरेन्द्रसिंह ने पैरवी करते हुए कहा कि बासनी थाने के सब इंस्पेक्टर गजेन्द्रसिंह को पिछले महीने रिश्वत लेते पकड़ा गया था, उस ट्रेप कार्यवाही में याचिकाकर्ता का नाम नहीं है। घटना के दिन याची की ड्यूटी सूरसागर एरिया में थी, जहां कानून व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई थी। याची को न तो रंगे हाथों पकड़ा गया है और न ही उससे कोई बरामदगी हुई है। याची ने एक दिन पहले बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई की थी, जिसके बदले की भावना से यह कार्यवाही करवाई गई। कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए एसीबी को जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 1 जुलाई को होगी।
बजरी डम्पर संचालन में रिश्वत व बंधी के मामले में एसीबी ने पुलिस निरीक्षक संजय बोथरा की तलाश में रातानाडा पुलिस लाइन व बोरानाडा के पास जैन एनक्लेव में दबिशें देकर छापे मारे। दस मई को बासनी थाने में एसआई गजेन्द्रसिंह को बीस हज़ार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया था। तत्कालीन थानाधिकारी बोथरा व हेड कांस्टेबल तेजाराम मेघवाल फरार हैं। हेड कांस्टेबल को दो दिन पहले ही निलम्बित किया गया था।