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अविनाश केवलिया/जोधपुर. हेरिटेज स्थलों के देसी-विदेशी पर्यटक जितना आकर्षित होते हैं उतनी ही लापरवाही भी बरत रहे हैं। स्थानीय प्रशासन या निकाय भी इस खतरे के प्रति सजग नहीं है। शहर के भीतरी क्षेत्र की प्राचीन बावडिय़ां जहां पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही हैं लेकिन यहां सुरक्षा के प्रति लापरवाही खतरनाक भी हो सकती है। ऐसा ही एक प्राचीन जलस्रोत तूरजी का झालरा है। यहां पिछले वर्षों में कई हादसे हो चुके हैं और कई लोगों की जान भी जा चुकी है। जेडीए की ओर से प्रस्तावित हेरिटेज पाथ के रास्ते में आने वाला यह झालरा पूरे साल ही देसी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार रहता है। लेकिन इन दिनों नए साल की छुट्टियां मनाने आए पर्यटक यहां ज्यादा संख्या में पहुंच रहे हैं। खास बात यह है यह धरोहर जितनी आकर्षक है उतनी ही खतरनाक भी।
कई हादसे फिर भी हालात वही
यहां आने वाले लोग लापरवाही बरतते हैं और पैर फिसलने से पानी में डूबते हैं। पिछले तीन-चार साल में यहां डूबने से 5-7 मौतें हो चुकी है। फिर भी यहां न तो कोई देखरेख करने वाला है और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम प्रशासन की ओर से होते दिखते हैं। सोमवार को भी इस झालरे को निहारने कई पर्यटक पहुंचे। खास बात यह है कि ये पर्यटक भी बेरोकटोक झालरे के निचले हिस्से तक जा रहे थे। यह जाने बिना कि वहां से पहले भी कई बार पैर फिसल कर गिरने के हादसे हो रखे हैं।
पत्रिका अपील
ऐसे स्थल जो कि आकर्षक होने के साथ ही खतरनाक भी है वहां प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था की जानी चाहिए। यहां नगर निगम ने बोर्ड लगाकर यह तो बता दिया कि सम्पत्ति पर अतिक्रमण करना अपराध है। लेकिन हादसों के बारे में न तो चेतावनी जारी की और न ही किसी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था। जबकि पर्यटन सीजन में यहां सुरक्षा गार्ड होने जरूरी है।
Published on:
02 Jan 2019 03:47 pm
