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5 घंटे की इस बैठक के बाद हटा MBM college से ‘नो एडमिशन’ का टैग, औपचारिक घोषणा 24 को

दिल्ली में एआईसीटीई के कार्यालय में एक्सपर्ट कमेटी के सामने कॉलेज प्रबंधन ने रखा अपना पक्ष  

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जोधपुर . जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से संबंध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में एनएसएस शैक्षणिक सत्र 2018-19 में बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग डिग्री के पाठ्यक्रम में प्रवेश हो सकेंगे। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद कॉलेज में लगे नो एडमिशन को हटाने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। इसकी औपचारिक घोषणा 24 सितंबर को एआईसीटीई की रिव्यू कमेटी में की जाएगी। एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज और राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को दिल्ली स्थित एआईसीटीई के दफ्तर में अपना पक्ष रखा गया। एआईसीटीई की ओर से उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव पुष्पा सत्यानी, कॉलेज के डीन प्रोफेसर एसएस मेहता और इलेक्ट्रॉनिक्स विभागाध्यक्ष प्रोफेसर राजेश भदादा दिल्ली पहुंचे।

एआईसीटीई की ओर से गठित एक्सपर्ट कमेटी के सामने कॉलेज के डीन प्रोफेसर मेहता और प्रोफेसर भदादा ने 5 घंटे तक अपना पक्ष रखा। एआईसीटीई की ओर से बताई गई कमियों के संबंध में एक-एक करके उत्तर दिया गया। कॉलेज प्रबंधन ने कमेटी के सामने सभी प्रमाण पत्र और दस्तावेज प्रस्तुत किए। कॉलेज में चल रहे विकास कार्यों को फ ोटोग्राफ के माध्यम से दिखाया गया। इंश्योरेंस ऑक्यूपेशनल सर्टिफि केट बिल्डिंग स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट सहित कई दस्तावेज को कमेटी ने प्रमाणित माना। एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में कॉलेज को मिल रही 25 करोड रुपए की ग्रांट भी कमेटी के समक्ष पेश की। इसमें से 10 करोड़ राज्य सरकार देगी। कॉलेज प्रबंधन की ओर से दिखाए गए सारे दस्तावेज और प्रयासों से कमेटी पूरी तरीके से संतुष्ट नजर आई। कमेटी ने रिपोर्ट तैयार कर ली। अनौपचारिक तौर पर कमेटी ने अगले शैक्षणिक सत्र में प्रवेश को हरी झंडी देने की बात कही, लेकिन औपचारिक रिपोर्ट और न्यू एडमिशन का टैग हटाने की घोषणा 24 सितंबर को एआईसीटीई की रिव्यू कमेटी में की जाएगी। एक्सपर्ट कमेटी के साथ केवल दोनों प्रोफ़ेसर ही कॉलेज का पक्ष रख रहे थे। बाहर के कक्ष में उच्च शिक्षा की संयुक्त सचिव के साथ कॉलेज के एल्यूमिनी बीएल मोहता अन्य तैयारियों को रूप देने लगे हुए थे।

कॉलेज के लिए खुद ही जेब से पैसे भर दिए


एआईसीटीई की एक्सपर्ट कमेटी ने जब कॉलेज की 30 करोड़ की बिल्डिंग और 10 करोड़ के उपकरण के इंश्योरेंस के कागज देखे तो वह हैरान रह गए। इनका इंश्योरेंस कॉलेज के 1985 बैच के छात्रों ने अपनी जेब से किया था। तब एक्सपर्ट कमेटी के सदस्यों ने कहा कि आप कॉलेज को बचाने के लिए अपनी जेब से भी पैसे खर्च कर देते हो हमने तो इतना डेडिकेशन कहीं नहीं देखा। इसके बाद जब कॉलेज की प्रयोगशाला के उपकरण की लिस्ट और बिल देखे तब भी कमेटी सदस्य बोले कि आपके पास तो सारा सामान है, कॉलेज के लिए खुद ही जेब से पैसे भर दिए फि र जीरो सेशन करने की नौबत ही क्यों आई। कॉलेज प्रबंधन की ओर से एक-एक करके क्रमवार रिपोर्ट प्रस्तुत करने के सिलसिले में एक्सपर्ट कमेटी को कायल कर दिया।

मैं खुद जोधपुर आऊंगा

एआईसीटीई के वॉइस चेयरमैन एमएल पुनिया खुद कॉलेज के छात्र रहे हैं उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और राज्य सरकार के अधिकारियों से कहा कि वह आगामी कुछ दिनों में स्वयं ही जोधपुर आकर कॉलेज में चल रही तैयारियों का जायजा लेंगे। देखेंगे कि उनका कॉलेज किस तरह से चल रहा है और क्या कमियां हैं, उनको और शीघ्र पूरा करके बेहतर कॉलेज बनाया जाएगा।

शाम तक कॉलेज में अलर्ट रहें प्रोफेसर


जब दिल्ली में यह आईसीटी के कार्यालय में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रबंधन और एक्सपर्ट कमेटी के मध्य वार्ता चल रही थी। उस वक्त जोधपुर में कॉलेज में सभी विभागों के विभाग विभागाध्यक्ष डीन ऑफि स में सुबह से लेकर शाम तक अलर्ट पोजीशन में बैठे रहे। सभी विभागाध्यक्ष को हिदायत दी गई थी कि दिल्ली में कभी भी किसी भी दस्तावेज की जरूरत पड़ते ही तुरंत ई-मेल के जरिए भिजवा दिया जाए। लेकिन पूरी बैठक के दरमियान किसी भी चीज की जरूरत नहीं पड़ी। कॉलेज के डीन प्रोफेसर मेहता अपने साथ पहले ही सारे दस्तावेज लेकर गए थे, जब शाम 4:30 बजे प्रोफेसर मेहता ने फोन करके सभी शिक्षकों को कहा कि अब वह घर चले जाएं, बैठक खत्म हो गई है। उसके बाद शिक्षक अपने-अपने घर के लिए रवाना हुए।

यह है मामला

गौरतलब है कि एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में निरीक्षण के लिए एआईसीटीई की टीम ने कॉलेज में छोटी-मोटी कमियां बताकर नए शैक्षणिक सत्र 2018-19 को नो एडमिशन घोषित कर दिया था। कॉलेज की 1951 में स्थापना के बाद यह पहला मौका था जब कॉलेज को इतना बड़ा धक्का लगा था। एआईसीटीई ने मामूली कमियों के आधार पर कॉलेज में नए सिखने सत्र पर रोक लगाई थी। मामले की जानकारी मिलते ही अगले ही दिन उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कॉलेज प्रबंधन के साथ बैठक करके सारी कमियों को तत्काल दूर कर एआईसीटीई के समक्ष विशेष अपील दायर कर दी थी। कॉलेज प्रबंधन ने शीघ्र ही ऑक्यूपेशनल सर्टिफि केट जनरल इंश्योरेंस प्रयोगशाला में उपकरण की कमी लाइब्रेरी में जर्नल की कमी बिल्डिंग की मेंटेनेंस सहित छोटी-मोटी कमियों को पूरा कर उनके दस्तावेज इक_ा किए और दिल्ली में एक्सपर्ट कमेटी के सामने अपनी रिपोर्ट रखी।