
तीन साल तक लटकाए रखा, एजी की राय के बाद एनएलयू का यू-टर्न
जोधपुर. देश के 23 राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में से केवल एनएलयू दिल्ली और एनएलयू जोधपुर में ही मूल निवासियों को आरक्षण लागू नहीं है। राज्य सरकार की ओर से 2018 में आरक्षण को हरी झंडी देने के बावजूद एनएलयू ने जांच कमेटी के नाम पर तीन साल तक आरक्षण को लटकाए रखा। इस साल जनवरी में राज्य सरकार को पत्र लिखकर आरक्षण देने से साफ मना कर दिया, तब सरकार ने महाधिवक्ता की राय ली। महाधिवक्ता ने मूल निवासियों के आरक्षण देने को सही माना, तब अब जाकर एनएलयू आरक्षण देने के लिए तैयार हुआ है। एनएलयू की एकेडमिक काउंसिल आरक्षण का प्रस्ताव पास करके राज्य सरकार को भेजेगी। राज्य सरकार विधानसभा में एनएलयू एक्ट में संशोधन करेगी। इसके बाद आरक्षण लागू होगा।
एनएलयू जोधपुर में पंचवर्षीय विधि पाठ्यक्रम में 104 सीटें भारतीयों और 17 एनआरआई सीटें हैं। वर्तमान में अनुसूचित जाति के लिए 15 फ़ीसदी, अनुसूचित जनजाति के लिए 7.5 फीसदी और दिव्यांग के लिए 5 फ़ीसदी आरक्षण लागू है। देश के अन्य एनएलयू अपने मूल राज्य के निवासियों को प्रवेश में आरक्षण दे रहे हैं। इसके म²ेनजर 5 मार्च 2018 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने विधानसभा में एनएलयू में 25 फ़ीसदी सीटें आरक्षित करने की घोषणा की थी। एनएलयू जोधपुर ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस मंजू गोयल की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी बना दी। जस्टिस गोयल कमेटी ने पिछले साल रिपोर्ट में आरक्षण को सही नहीं माना। इस पर एनएलयू ने गत जनवरी में राज्य सरकार को पत्र लिखकर आरक्षण देने से इनकार कर दिया। राज्य सरकार के महाधिवक्ता की राय के बाद अब एनएलयू आरक्षण के लिए तैयार हुआ है।
क्लेट वाले सभी 21 एनएलयू में आरक्षण
एनएलयू दिल्ली अपनी प्रवेश परीक्षा आइलेट अलग करवाता है जबकि देश के शेष 22 एनएलयू की प्रवेश परीक्षा क्लेट का आयोजन एक साथ होता है। जोधपुर को छोडकऱ शेष एनएलयू बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता, रायपुर, गांधी नगर, लखनऊ, पंजाब, पटना, कोच्चि, उड़ीसा, रांची, असम, विशाखापट्टनम, तिरुचिरापल्ली, मुंबई, नागपुर, औरंगाबाद, शिमला, जबलपुर और हरियाणा में वहां के मूल निवासियों को आरक्षण है।
Published on:
15 Sept 2021 08:48 pm
