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एडीएम को ट्रेप करवाने के बाद भी पप्पूराम को नहीं मिला न्याय

पीपाड़ शहर के चिरढाणी गांव में जमीन की पत्थरगढ़ी के मामले में एडीएम को ट्रेप करवाने के बाद भी परिवादी को न्याय नहीं मिल पाया।
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Agriculture land dispute in Piparcity

एडीएम को ट्रेप करवाने के बाद भी पप्पूराम को नहीं मिला न्याय

पीपाड़सिटी (जोधपुर). पीपाड़ शहर के चिरढाणी गांव में जमीन की पत्थरगढ़ी के मामले में एडीएम को ट्रेप करवाने के बाद भी परिवादी को न्याय नहीं मिल पाया। परिवादी की जमीन की पत्थरगढ़ी (पैमाइश) करवाने के लिए जिला कलक्टर ने सोमवार को विशेष टीम भेजी, लेकिन दूसरे पक्ष के विरोध करने पर तनाव बढ़ गया और टीम को वापस लौटना पड़ा।

परिवादी पप्पूराम गत पांच साल से जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए विभागों के चक्कर काट रहा है। इस दौरान उसने रिश्वत मांगने वाले एडीएम को ट्रेप भी करवाया, लेकिन उसकी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटा। यह है मामलाचिरढाणी गांव की सरहद में खसरा नम्बर 865 के खातेदार पप्पूराम साध की कृषि भूमि की पत्थरगढ़ी और पैमाइश के लिए जिला कलक्टर के निर्देश के बाद राजस्व तहसीलदार ने विशेष टीम गठित की थी।

टीम पुलिस के साथ दोपहर 12 बजे गांव पहुंची और पैमाइश शुरू की। इस दौरान खसरा नम्बर 866 में पड़ोसी की जमीन में करीब दस फीट अंदर जाने से दूसरे पक्ष के लोग आक्रोशित हो गए। विरोध जता रहे खातेदार के अनुसार पूर्व में तहसीलदार ने ही पत्थरगढ़ी की थी। वे उसी रिपोर्ट को मानेंगे।

विवाद के बढऩे पर विशेष टीम के भू अभिलेख निरीक्षक प्रहलाद सिंह, कैलाश मीणा के साथ हल्का पटवारी ने परिवादी के खेत की तीन तरफ पैमाइश की, लेकिन विवादित मेड़ की तरफ को विरोध के चलते छोड़ दिया।

एडीएम रिश्वत लेते हुए था ट्रेप

इस विवादित कृषि भूमि की पत्थरगढ़ी का मामला गत सप्ताह उस समय पूरे राज्य में चर्चित हो गया जब अतिरिक्त जिला कलक्टर विजय सिंह नाहटा पीडि़त परिवादी पप्पूराम साध से दस हजार की रिश्वत लेने के आरोप में जोधपुर एसीबी टीम की गिरफ्त में आ गया। एडीएम ने भी तहसीलदार से पत्थरगढ़ी कराने की एवज में रिश्वत ली थी।

इन्होंने कहा

‘पुलिस जवानों की कमी से और विरोध को देखते हुए विवादित मेड़ की तरफ पत्थरगढ़ी नहीं हो पाई। तहसीलदार को रिपोर्ट पेश कर दी गई है।
-प्रहलाद सिंह, भू-अभिलेख निरीक्षक

टीम की रिपोर्ट मिलने पर जिला कलक्टर को स्थिति से अवगत कराने के बाद उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-गलबाराम मीणा, राजस्व तहसीलदार, पीपाड़सिटी