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उदयपुर की अंकिता को अब मिलेगा सिल्वर मेडल

- पुनर्मूल्यांकन में 32 अंक बढऩे के बावजूद नहीं बदली थी मेरिट लिस्ट - हाईकोर्ट ने किया आयुर्वेद विवि का अध्यादेश रद्द
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Ankita of Udaipur will now get silver medal

Ankita Siyal

जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से जारी पुनर्मूल्यांकन के बाद संशोधित परिणामों को दरकिनार कर प्रथम मेरिट सूची में अव्वल आने वालों को ही पदक देने सम्बंधी अध्यादेश को रद्द कर दिया।

कोर्ट ने विवि को चार सप्ताह में पूर्व में वितरित पदक वापस लेते हुए एक छात्रा को रजत पदक देने के आदेश दिए हैं। इस छात्रा का पुनर्मूल्यांकन के बाद मेरिट सूची में दूसरा स्थान था, लेकिन विवि ने अध्यादेश का हवाला देते हुए उसे रजत पदक देने से मना कर दिया था।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा और न्यायाधीश दिनेश मेहता की खंडपीठ ने उदयपुर निवासी अंकिता सियाल की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि विवि का अध्यादेश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, इसे विधि सम्मत नहीं माना जा सकता।

याची अंकिता ने वर्ष 2011 में विवि से संबद्ध नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद से बेचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) का डिग्री कोर्स उत्तीर्ण किया था।

अधिवक्ता डॉ. निखिल डूंगावत और निहार जैन ने खंडपीठ को बताया कि विवि के अध्यादेश के पूर्व प्रावधान के अनुसार पुनर्मूल्यांकन में परिणाम भले ही संशोधित हो गया हो, लेकिन प्रथम मेरिट लिस्ट में अव्वल रहने वाले शुरुआती दस नतीजों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।

यह था मामला

अंकिता ने कुल 3512 अंक प्राप्त किए थे, लेकिन वह परिणाम से असंतुष्ट थी और उसने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।

इसमें उसके 32 नंबर बढ़ गए। कुल 3544 आने पर अंकिता रजत पदक के लिए पात्र हो गई, लेकिन दीक्षांत समारोह से पहले मेरिट होल्डर्स की लिस्ट जारी की गई थी। इसमें रजत पदक के लिए श्रीगंगानगर की मनीषा तिवारी का नाम घोषित किया गया। मनीषा के पुनर्मूल्यांकन से पहले अंकिता से ज्यादा अंक थे, लेकिन पुनर्मल्यांकन के बाद वह तीसरे स्थान पर आ गई थी।

इस पर आपत्ति किए जाने पर विवि ने जवाब दिया कि नियमानुसार परीक्षा परिणाम के पुनर्मूल्यांकन के बाद भी पहली मेरिट सूची के आधार पर ही मेडल दिया जाता है। जबकि अन्य यूनिवर्सिटी में पुनर्मूल्यांकन से पहले प्रोविजनल मेरिट लिस्ट जारी होती है तथा पुनर्मूल्यांकन के बाद अंतिम मेरिट सूची घोषित की जाती है।

सुनवाई के दौरान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती सुधारते हुए अध्यादेश में संशोधन कर दिया, लेकिन इसका प्रभाव पश्चावर्ती होने से अंकिता को कोई लाभ नहीं मिलना था। अब हाईकोर्ट ने इस त्रुटिपूर्ण प्रावधान को ही अपास्त कर दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूनिवर्सिटी को प्रथम मेरिट सूची में दूसरे व तीसरे नंबर पर पदक लेने वालों से पदक वापस लेने होंगे। इनमें से पुनर्मूल्यांकन के बाद दूसरे पायदान पर आई अंकिता को चार सप्ताह में रजत पदक व प्रमाण पत्र देने के आदेश दिए गए हैं।

हार नहीं मानी तो बन गई नजीर
अंकिता ने कहा कि उसने एग्जाम के लिए अच्छी मेहनत की और उसका पेपर भी अच्छा हुआ था। नम्बर कम आए तो उसने रिवेल करवाया।

अंकिता ने कहा कि जब पुनर्मूल्यांकन में नंबर बढ़े तो उसने विवि को बताया लेकिन वे नहीं माने। पत्रिका से बातचीत में अंकिता ने कहा कि उसने हार नहीं मानी और सोचा कि यहां भी एक परीक्षा और देगी।

उसने और मम्मी-पापा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। कोर्ट ने उसकी सुनी और उसके पक्ष में फैसला हुआ। उसने कहा कि पूनर्मूल्यांकन का प्रावधान ही इसीलिए रखा गया है कि किसी के नम्बर गलती से गणना में कम है तो उसकी सही गणना हो जाए। इसके लिए बाकायदा फीस दी जाती है। इसके बावजूद विवि बढ़े हुए नंबर को आधार मानकर उसकी मेरिट को नहीं बदल रहा था। जो कि गलत था।

अंकिता ने कहा कि वह इस निर्णय पर खुश है। अब उसकी मेहनत का परिणाम आया है। इस फैसले से प्रतिभावान विद्यार्थियों के हौसले बुलंद होंगे। यह फैसला दूसरों के लिए नजीर है।