10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कहीं तस्करों के लिए सहयोगी साबित तो नहीं हो रहे ‘टोल नाके’, कई जिलों में पहुंच रही है मादक पदार्थों की खेप

राज्य के अनेक जिलों में प्रतिदिन लग्जरी वाहनों के साथ ही ट्रकों में मादक पदार्थ की बड़ी खेप पहुंच रही है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इनकी धरपकड़ भी कर रही है, लेकिन लग्जरी वाहन व हथियारों से लैस तस्करों को पकडऩा सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे से भरा होता जा रहा है।
2 min read
Google source verification
are toll plazas in rajasthan becoming beneficial for smugglers

कहीं तस्करों के लिए सहयोगी साबित तो नहीं हो रहे 'टोल नाके', कई जिलों में पहुंच रही है मादक पदार्थों की खेप

विकास चौधरी/जोधपुर. राज्य के अनेक जिलों में प्रतिदिन लग्जरी वाहनों के साथ ही ट्रकों में मादक पदार्थ की बड़ी खेप पहुंच रही है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो इनकी धरपकड़ भी कर रही है, लेकिन लग्जरी वाहन व हथियारों से लैस तस्करों को पकडऩा सुरक्षा एजेंसियों के लिए खतरे से भरा होता जा रहा है। पकड़ में न आने के लिए तस्कर न सिर्फ वाहन को टक्कर मारने पर आमादा रहते हैं बल्कि हथियार से फायरिंग करने तक से नहीं चूकते हैं। यही वजह है कि तस्करों को पकडऩे के लिए टोल प्लाजा सबसे सुरक्षित जगह माना जाने लगा है। सुरक्षा एजेंसियों का प्रयास रहता है कि तस्करों को नजदीकी टोल प्लाजा पर घेराबंदी करके पकड़ा जाए ताकि आगे व पीछे वाहनों की कतारों से उन्हें न तो भागने का मौका मिलता है और न ही वाहनों को टक्कर मारने की परिस्थितियां होती हैं।

पकड़ में नहीं आएं : टक्कर या गोली मारकर भागो
सूत्रों की मानें तो मादक पदार्थों की तस्करी में लिप्त अधिकांश तस्कर लग्जरी कारों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह वाहन चोरी के होते हैं जो पुलिस या एनसीबी के वाहनों से तेज रफ्तार में भागते हैं। मादक पदार्थ की खेप लाने के दौरान तस्करों का एक ही मकसद रहता है कि रास्ते में यदि पुलिस या एनसीबी रोकने का प्रयास करे तो किसी भी हालत में रूकना नहीं है। वाहनों को टक्कर मारकर भाग निकलने का प्रयास रहता है। कई बार वे फायरिंग तक कर डालते हैं।

टोल प्लाजा से सहूलियत
राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ ही स्टेट हाइवे पर अधिकांश जगह टोल प्लाजा (नाके) संचालित हो रहे हैं। सुरक्षा एजेंसी यदि किसी तस्कर का पीछा कर रही होती है अथवा उन्हें पुख्ता सूचना होती है तो उनका प्रयास यही रहता है कि तस्कर के वाहन को नजदीकी टोल प्लाजा पर घेरकर पकड़ा जाए।

टोल प्लाजा से तस्कर भी आशंकित
तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई व कार्ययोजना से भी सचेत रहते हैं। टोल प्लाजा पर पकड़ में आने से आशंकित भी होते हैं। यही वजह है कि गत दिनों एनसीबी की एक कार्रवाई में ट्रक चालक ने टोल प्लाजा से पहले ही ट्रक रोक लिया था। खलासी को पैदल ही टोल प्लाजा भेजकर पुलिस या अन्य एजेंसी के बारे में पूरी तरह पड़ताल कराई गई थी। पूरी तरह तसल्ली होने के बाद चालक ट्रक लेकर टोल प्लाजा आया था। उसके आगे व पीछे वाहन होने पर एनसीबी ने टोल नाके पर दबिश देकर ट्रक व उसमें मादक पदार्थ जब्त किया था।

एनसीबी की टोल प्लाजा पर प्रमुख कार्रवाई
-6 मार्च: अजमेर में एनएच-18 पर किशनगढ़ (अजमेर) टोल प्लाजा पर ट्रक से अफीम का 17.07 किलो दूध व 2720 रुपए जब्त। दो आरोपी गिरफ्तार।
-22 जनवरी: जयपुर जिले में एनएच-21 पर बस्सी में राजाधोक टोल प्लाजा पर ट्रक से अफीम का 42.38 किलो दूध जब्त। दो आरोपी गिरफ्तार।
-16 दिसम्बर : जयपुर में एनएच-21 पर बस्सी में राजाधोक टोल प्लाजा पर एक ट्रेलर से 809 किलो डोडा पोस्त और अफीम का 19.37 किलो दूध जब्त। दूसरे ट्रेलर से अफीम का 40.61 किलो दूध जब्त। दोनों चालक गिरफ्तार।