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टिड्डी से परेशान अर्जेंटीना भारत से सीख रहा बचाव का तरीका

- अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे व उरुग्वे पिछले टिड्डी दलों से ढंग से नहंी निपट पाए, फसलें हो गई थी चौपट- रेगिस्तान टिड्डी के स्थान पर टिड्डी की दक्षिणी अमरीकी प्रजाति ने छकाया- जोधपुर स्थित एलडब्ल्यूओ मुख्यालय पहुंचकर दो साल की सक्सेस स्टोरी जानी
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टिड्डी से परेशान अर्जेंटीना भारत से सीख रहा बचाव का तरीका

टिड्डी से परेशान अर्जेंटीना भारत से सीख रहा बचाव का तरीका

जोधपुर. भारतीय उपमहाद्वीप में गत वर्ष 26 साल बाद टिड्डी ने बड़े पैमाने पर हमला किया था। 100 से अधिक दल आए जो नेपाल तक जा पहुंचे। कुछ यही हाल दक्षिण अमरीकी देशों का भी हुआ। ब्राजील, अर्जेंटीना, पराग्वे, उरुग्वे और बोलिविया में टिड्डी ने बेजां उत्पात मचाया। भारत ने टिड्डी का जमकर मुकाबले करते खरबों टिड्डी पर लाखों लीटर पेस्टीसाइड स्प्रे करके जमीन पीली और भूरी कर दी, लेकिन अर्जेंटीना सहित अन्य देश टिड्डी के आगे चित्त हो गए। भारत और पाकिस्तान ने ऐसा प्रबंध किया कि इस साल अब तक टिड्डी नहीं आई। भारत की यह सक्सेस स्टोरी जानने के लिए अर्जेंटीना सरकार के निर्देश पर दिल्ली स्थित अर्जेंटीना दूतावास के कृषि अधिकारी मरियानो बेहरान गुरुवार को जोधपुर पहुंचे। भारत में टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्लयूओ) का मुख्यालय जोधपुर में है। यहां पर भारतीय अधिकारियों ने बेहरान को विभिन्न पेस्टीसाइड, सर्वे करने का तरीका, हॉपर बैंड व टिड्डी दलों पर हमला, हवा की स्थिति देखकर अलसुब ऑपरेशन सहित विभिन्न तकनीक साझा की।

माइक्रोनियर, अलवामास्ट के अलावा हेलीकॉप्टर ऑपरेशन की जानकारी
एलडब्लयूओ के सहायक निदेशक डॉ वीरेंद्र कुमार, टिड्डी क्षेत्र अन्वेषन केंद्र बीकानेर के प्रभारी अधिकारी डॉ. एसके वर्मा, रेगिस्तान टिड्डी सूचना अधिकारी डॉ पंकज सालुंके, एनआर मीना सहित अन्य अधिकारियों ने बेहरान का भारतीय तकनीक के बारे में जानकारी दी। अर्जेंटीना को बताया गया कि गत वर्ष ब्रिटेन से माइक्रोनियर और अल्वामास्टर मशीनें खरीदकर टिड्डी ऑपरेशन वृहद पैमाने पर किया गया था। प्राइवेट हेलीकॉप्टर की सेवाएं और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर का टिड्डी ऑपरेशन के लिए किए गए मॉडिपिकेशन के बारे में बताया। बीकानेर में चल रहे मेटारायझीअम व नीम के जैविक कीटनाशी की जानकारी दी गई। साथ ही ई लोकस्ट-3, सूचना प्रणाली व टिड्डी डाटा संग्रहण की तकनीक साझा की।

अर्जेंटीना में टिड्डी की अलग प्रजाति
पूरे विश्व में टिड्डी की दस प्रजाति है। अर्जेंटीना में टिड्डी की दक्षिण अमरीकी प्रजाति पाई जाती है जो थार व सहारा मरुस्थल की रेगिस्तानी टिड्डी से अधिक खतरनाक है। यह तेजी से फसलें चौपट करती है। दक्षिण अमरीका महाद्वीप के दक्षिणी भाग में गत वर्ष जून, जुलाई और अगस्त में टिड्डी हमले हुए थे। वहां तापमान कम होने और वर्षा पर्याप्त होने से टिड्डी पनपी।
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‘भारत की टिड्डी से निपटने की दो साल की सक्सेस स्टोरी जानने अर्जेंटीनीयाई अधिकारी आए थे। वे अपने यहां टिड्डी से निपटने में हमारी मदद लेना चाहते हैं।’
डॉ वीरेंद्र कुमार, सहायक निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन जोधपुर