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आसाराम के वकील ने पीडि़ता की उम्र पर खड़े किए ये सवाल, ये हैं कोर्ट कचहरी की खास खबरें

आसाराम की ओर से अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा ने अंतिम बहस को आगे बढ़ाया।

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RP BOHRA/जोधपुर.

आसाराम के वकील ने कहा- पीडि़ता की उम्र साबित करने का भार अभियोजन पक्ष पर

नाबालिग से यौन दुराचार के आरोप में फंसे आसाराम के मामले में गुरुवार को भी बचाव पक्ष की अंतिम बहस अधूरी रही। अनुसूचित जाति-जनजाति अदालत के पीठासीन अधिकारी मधुसुदन शर्मा के समक्ष आसाराम की ओर से अधिवक्ता सज्जनराज सुराणा ने अंतिम बहस को आगे बढ़ाया। अधिवक्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट की नजीरें पेश कर बताया कि पीडि़ता की उम्र को साबित करने का भार अभियोजन पक्ष पर ही है, लेकिन ऐसा कोई ठोस गवाह पेश नहीं किया है। ना ही ऐसे कोई दस्तावेज को प्रमाणित करवाया, जिससे साबित हो कि पीडि़ता नाबालिग थी। केवल आसाराम को फंसाने के सबकुछ किया गया है। समयाभाव के चलते अंतिम बहस पूरी नहीं हो पाई। आसाराम को पेश किया गया तो उसके समर्थक उमड़ पडे़।

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वाणिज्यिक अदालतें बंद करने का मामला: हाईकोर्ट प्रशासन व सरकार ने दिया जवाब

राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में वाणिज्यक अदालतो को बंद करने के मामले में गुरुवार को राज्य सरकार व हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने जवाब पेश किया। जवाब में बताया गया कि हाईकोर्ट प्रशासन ने वाणिज्यिक अदालतों की पेंडेंसी, इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए होने वाले खर्चे व मानव संसाधन आदि को लेकर फिलहाल सिर्फ जयपुर में ही संचालित करने का निर्णय किया। जस्टिस संगीत लोढ़ा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ ने कहा कि हो सकता है इसमें प्रेक्टिकल दुश्वारियां सामने आई होंगी। आखिर इसके बारे में एक्ट भी बनाया गया है। उसको भी मद्देनजर रखना होगा। मामले की सुनवाई समयाभाव के कारण पूरी नहीं हो सकी। खंडपीठ ने इसे शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रखने के आदेश दिए।
खंडपीठ में सरकार के नोटिफिकेशन पर स्थगन आदेश के लिए राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की ओर से दायर जनहित याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर सिंघवी ने अधिवक्ता अनिल भंडारी, रमित मेहता, रमनदीप सिंह खरलिया आदि ने पक्ष रखा। उनका कहना था कि राज्य के विधि विभाग के प्रमुख शासन सचिव द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट की सलाह को आधार बता राज्य में 20 अप्रेल 2016 से गठित 35 वाणिज्यिक अदालतों को बंद कर पूरे राजस्थान का क्षेत्राधिकार सिर्फ जयपुर कर दिया। गत 24 अक्टूबर को अपर जिला व सेशन न्यायाधीश महानगर जयपुर को वाणिज्यिक न्यायालय का अतिरिक्त कार्यभार दे दिया गया। इससे संपूर्ण प्रदेश में अफरा-तफरी फैल गई। अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या दूरस्थ जिलों से पक्षकार अपने मुकदमे की पैरवी अथवा तारीख लेने के लिए बार-बार जयपुर जाएंगे।

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एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया न्यायालय के आदेशों के अधीन

जयनारायण विश्वविद्यालय के तहत एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज अभियांत्रिकी संकाय में विभिन्न पदों पर की जा रही प्रस्तावित भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में डॉ. जस्टिस पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने दोनों पक्षों को सुुनने के बाद संबंधित विभाग की भर्ती प्रक्रिया को न्यायालय के आदेशों के विचाराधीन रखने का निर्णय दिया। डॉ. जस्टिस भाटी ने यह आदेश याचिकाकर्ताओं सौरभ पंवार व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं में दिए। याचिकाकताओं की ओर से पैरवी करते हुए डॉ. निखिल डुंगावत व निहार जैन रोस्टर बिन्दुओं व आरक्षण नीतियों के विरुद्ध विज्ञापित भर्ती पर सवाल उठाते हुए यह तर्क दिया कि विश्वविद्यालय प्रशासन अविधिपूर्ण तरीके से भर्ती प्रक्रिया संपन्न करने पर प्रयासरत है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जानबूझकर आरक्षित श्रेणी के पदों को नजरअंदाज करते हुए सभी पदों पर अनारक्षित श्रेणी तथा ओबीसी वर्ग में विभाजित कर दिया। इस गैर कानूनी तरीके से की जा रही भर्ती से व्यथित होकर यह याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से दीपेश सिंह बेनीवाल उपस्थित थे।

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अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश नहीं की तो गृहसचिव को बुलाया जाएगा-हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट में पाक हिन्दू विस्थापितों के मामले में गुरुवार को प्रगति रिपोर्ट पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। जस्टिस संगीत लोढ़ा व जस्टिस विनीत माथुर की खंडपीठ में अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) कान्तिलाल ठाकुर को रिपोर्ट पेश करनी थी। रिपोर्ट पेश नहीं करने पर हाईकोर्ट ने पूछा- रिपोर्ट क्यों नहीं पेश की। इस पर एएजी का जवाब सुनकर एकबारगी तो कोर्ट भी हैरान रहा गया। एएजी ने कहा कि न तो सीआईडी सही आकड़े दे रही है, न ही जवाब कि कितने मामले में अटके हुए हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि या तो अगली सुनवाई पर प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए अन्यथा गृह सचिव को कोर्ट में तलब किया जाएगा। न्यायमित्र कमल दवे ने कहा कि लम्बी अवधि व कम अवधि के वीजा की कई अर्जियां लंबित हैं, लेकिन सीआईडी उनको क्लीयर नहीं कर रही है। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान सीआईडी एसपी श्वेता धनकड़ व एडीएम सीमा कविया मौजूद रहीं।