
जोधपुर. जोधपुर में निजी स्कूलों की मनमानी इस कदर बढ़ी हुई है कि अपने शिक्षक व स्टाफ को ऑनलाइन वेबसाइट पर व्यूवर्स आने पर ही भुगतान किया जा रहा है। शहर के कई नामचीन स्कूल अपने स्टाफ को प्रतिदिन बुला रहे है। उनके वीडियो बनाकर सोशल साइट्स पर डाल रहे है। साइट्स पर अगर दर्शक आते है तो शिक्षकों को भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में जोधपुर में आधे से ज्यादा निजी स्कूलों के शिक्षक बाकायदा कई व्हाट्स गु्रपों में अपने बनाए गए वीडियो शेअर कर रहे है। भोळावण दे रहे हैं कि उनके वीडियो खोलकर सबक्राइब करे। ताकि उन्हें पैसा मिले। वहीं आधे से ज्यादा जोधपुर की निजी स्कूलों ने अपने स्टाफ को मार्च के बाद से सैलेरी तक नहीं दीं, जिन्हें दी है तो उन्हें अब तक की सैलेरी का आधा भाग भी पूरा नहीं दिया है। निजी स्कूल के शिक्षकों का आरोप है कि स्कूल संचालक पहले खुद का भला सोच रहे है, वे कतई नहीं चाहते है कि उनकी मंथली इनकम किसी प्रकार से डाउन हो। जोधपुर जिले में प्रारंभिक शिक्षा विभाग व माध्यमिक शिक्षा विभाग मिलाकर कुल 1693 निजी स्कूल हैं। इनमें 15 हजार से ज्यादा शिक्षक आर्थिक तंगी का शिकार है। वहीं जोधपुर में अल्पसंख्यक प्रमाणित स्कूलों को आरटीई दायरे से बाहर रखा गया है, जो भी अपने स्टाफ को समय पर वेतन नहीं दे रहे है। सबसे ज्यादा फीस भी इन्हीं स्कूलों में अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई बाबत वसूली जा रही है।
केस- 1
हस्ताक्षर 15 हजार पर, दिए 8 हजार
रातानाडा की एक निजी स्कूल में कार्यरत शिक्षक धमेन्द्र ( परिवर्तित नाम) बीते 6 साल से इसी स्कूल में नौकरी कर रहा है। धमेन्द्र को कोरोनाकाल में मई तक 15 हजार रुपए वास्तविक सैलेरी का भुगतान किया। जून की तनख्वाह उसे अगस्त में दी गई, जो 8 हजार रुपए थी। धमेन्द्र ने कहा कि स्कूल वालों ने हस्ताक्षर 15 हजार पर करवाए। बाद में कह दिया कि बच्चों की फीस आएगी, उस हिसाब से पेमेंट करते रहेंगे। आर्थिक तंगी से परेशान धमेन्द्र ने अपने भाई के साथ दूसरा बिजनेस शुरू कर दिया।
केस-2
मनोज (परिवर्तित ) कुड़ी क्षेत्र की किसी स्कूल में जाते है। उन्हें मार्च से वेतन नहीं दिया गया। मनोज ने स्कूल में फोन कर अपना वेतन मांगा तो उन्हें प्रिंसिपल ने बुलाया। मनोज को बोला गया कि आप अब प्रतिदिन स्कूल आकर अपने वीडियो बनाओ। इस वीडियो में सबक्राइब अधिक आएंगे तो आपको उसका रुपया मिलेगा, वरना फिलहाल स्कूल पेमेंट करने की स्थिति में नहीं है। मनोज ने कहा कि जबकि 50 प्रतिशत विद्यार्थी सालाना की आधी फीस स्कूल में जमा करवा चुके है। उसके बाद स्कूल संचालक की पैसे देने की नीयत नहीं है।
Published on:
07 Nov 2020 02:58 pm
