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आखिर दिवाली पर होगा यूं होगा जोधपुर के गरीबों का मुंह मीठा, कलक्टर की मांग को सरकार ने किया पूरा

सहकारी गोदाम में रखी चीनी पड़ गई थी कम, सरकारी ने अतिरिक्त भेजी  

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जोधपुर . शहर के गरीबी की रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले (बीपीएल) और अंत्योदय परिवारों को नौ महीने बाद अब कहीं जा कर राशन की चीनी मिलेगी। यह चीनी जनवरी, फरवरी और मार्च महीने की है, जो जोधपुर क्रय-विक्रय सहकारी समिति और रसद विभाग ने रोक रखी थी। कम पडऩे पर कलक्टर ने सरकार से अतिरिक्त चीनी की मांग की थी, जो कुछ दिन पहले ही जोधपुर पहुंची है। यह चीनी दिवाली तक राशन की दुकानों के जरिये शहर के उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी।

केंद्र सरकार ने इस साल जनवरी, फरवरी और मार्च २०१७ की चीनी मार्च-अप्रेल महीने में ही भेज दी थी, लेकिन अधिकारियों ने यह गोदाम में दबाए रखी। सरकार ने जोधपुर शहर के लिए २२३० क्विंटल चीनी भेजी, मगर अधिकारियों ने बैकलॉग का बहाना कर के कई बोरी शक्कर इधर-उधर कर दी। जब मामला कलक्टर डॉ. रविकुमार सुरपुर के पास पहुंचा तब सहकारी गोदाम में केवल ८३० क्विंटल शक्कर थी। इस स्टॉक से शहर के लोगों को तीन महीने की चीनी का वितरण संभव नहीं था। एेसे में सरकार से अतिरिक्त आवंटन मांगा गया, जो अब पूरा हुआ है। सरकार ने करीब १४०० क्विंटल चीनी का स्टॉक भेजा है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार बीपीएल और अंत्योदय परिवारों को हर महीने आधा किलो चीनी प्रति यूनिट २५ रुपए किलो के अनुसार देती है।

पत्रिका ने उठाया था मामला


शहर के लोगों को पिछले लंबे समय से शक्कर नहीं मिलने की पीड़ा राजस्थान पत्रिका ने उजागर की थी। पत्रिका ने अपने ५ अगस्त के अंक में 'लाखों की चीनी ४ महीने क्यों रोकी, अब होगी जांच' शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया था।

गरीबों का निवाला छीनने पर लोकायुक्त हुए थे गंभीर


उल्लेखनीय है कि प्रदेश के लोकायुक्त एसएस कोठारी ने गरीबों के गेहूं पर हाथ साफ करने वाले जोधपुर के १२ राशन डीलर्स के खिलाफ सरकार को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार ने जोधपुर की अतिरिक्त संभागीय आयुक्त वंदना सिंघवी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में अजमेर के जिला रसद अधिकारी विनय कुमार के साथ राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के तकनीकी अधिकारी हनुमानसिंह को शामिल किया हैं। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।

शहर में राशन की १२ दुकानों के डीलर्स ने सितम्बर २०१६ से लेकर मार्च २०१७ तक पोस मशीन से फर्जी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करके कई उपभोक्ताओं का गेहूं स्वयं उठाकर बाजार में बेच दिया। जांच में सामने आया कि इन डीलर्स ने केवल फरवरी महीने में ही १३ लाख रुपए के गेहूं का गबन किया था। रसद विभाग ने फरवरी २०१७ में इन १२ दुकानों का लाइसेंस निलंबित कर दिया, लेकिन इसके बाद जांच के नाम पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। विभाग के अधिकारियों ने न तो इन डीलर्स से गबन की राशि वसूल की और न ही पुलिस में प्राथमिकी दर्ज करवाई है।