-जोधपुर शहर से करीब 26 किलोमीटर दूर है आयुर्वेद अस्पताल
-शहर के खांडा फलसा एवं अन्य आयुर्वेद अस्पतालों में पर्याप्त नहीं है सुविधाएं, इसलिए मरीजों को जाना पड़ रहा है करवङ स्थित आयुर्वेद अस्पताल
जोधपुर.
बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर, पंछी को छाया नहीं और फल लागे अति दूर। यह कहावत राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के करवड़ स्थित आयुर्वेद चिकित्सालय के लिए सार्थक साबित हो रही है। क्योंकि यहां के आयुर्वेद चिकित्सालय में अच्छे वैद्याचार्यों व चिकित्सकों के निर्देशन में इलाज तो अच्छा हो रहा है, लेकिन अच्छा इलात इतना दूर है कि आम मरीज यहां तक पहुंच कर लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
यहां अधिकतर वो ही मरीज पहुंच पा रहे हैं या तो जिन्हें वहां पर भर्ती होना है या फिर जो साधन-सम्पन्न हो। यह अस्पताल जोधपुर शहर के पावटा बस स्टैण्ड से करीब 23 व रेलवे स्टेशन से करीब 26 किलोमीटर दूर है। ऐसे में यदि बासनी, चौपासनी या कुड़ी-झालामंड क्षेत्र के लोगों को करवड़ अस्पताल इलाज के लिए जाना है तो उन्हें 40 से 45 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में रेलवे स्टेशन या बस स्टैण्ड से आयुर्वेद चिकित्सालय पहुंचने के लिए दो घंटे से अधिक समय लग जाता है। साथ ही मरीजों को यहां पहुंचने के बाद दिन भर परेशान होना पड़ता है। लोग सिटी बसों या अन्य साधनों से यहां बमुश्किल पहुंच रहे हैं। वहां परामर्श, इलाज, पंचकर्म थैरेपी आदि करवाने के बाद वापस लौटने के लिए भी लोगों को समय पर सिटी परिवहन सुविधा नहीं मिलने से परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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इसलिए जाना पड़ रहा है दूर-
बड़ा सवाल यह है कि आखिर लोगों को इतनी दूरी तय कर करवड़ स्थित आयुर्वेद अस्पताल क्यों जाना पड़ रहा है? इसका मुख्य कारण यह है कि शहर के खाण्डा फलसा, मगरा-पूंजला स्थित आयुर्वेद अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं व चिकित्सक नहीं हैं। एम्स में भी आयुष विंग को संचालन अब शुरू हुआ है, जिसके गतिशील होने में समय लगेगा। जानकारों का कहना है कि आयुर्वेद विभाग की ओर से जिला मुख्यालय के आयुर्वेद चिकित्सालय व डिस्पेंसरियों में सुविधाएं बढ़ जाएं तो लोगों को लम्बी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
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दूर जाकर कटवा रहे भारी शुल्क से जेब-
आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से संचालित करवड़ के आयुर्वेद अस्पताल में मरीजों को जांच से लेकर पंचकर्म के प्रत्येक कर्म के लिए शुल्क देना पड़ रहा है। जबकि ऐलोपैथी के सरकारी चिकित्सालय में इलाज नि:शुल्क हैं। चूंकि विवि ऑटोनोमॉस बॉडी है, इसलिए इलाज के शुल्क की दरें अपने स्तर पर तय कर रही है। दो साल पहले विवि की ओर से सरकार से नि:शुल्क इलाज के लिए फंड मांगा गया था, लेकिन फंड नहीं मिलने से विवि की ओर शुल्क पर ही इलाज करना पड़ रहा है। यहां पेंशनर्स व भामाशाह कार्ड धारक भी शुल्क जमा करवाकर इलाज करवा रहे हैं।
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आयुर्वेद अस्पताल में इलाज : शुल्क एक नजर-
पंचकर्म एक्सीलेंस सेन्टर में पंचकर्म के अलग-अलग तरह के प्रत्येक दिन के कर्म के लिए 300 से 500 रुपए का शुल्क निर्धारित है। शिरोधारा-300 रुपए, अभ्यंग व स्वेदन-500 रुपए, नस्यकर्म -150 रुपए, स्र्वांग वाष्प स्वेदन-250 सहित अन्य कर्म के अनुसार शुल्क तय है। इसी तरह से ब्लड, शुगर सहित अन्य जांचों के लिए शुल्क लिया जा रहा है।
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इनका कहना है-
हर मरीज को आयुर्वेद पद्धति से नि:शुल्क इलाज मिले, इसके लिए एक्सीलेंस सेन्टर के शुरूआत के समय ही सरकार को बजट दिलाने का मांग पत्र भेजा गया था। लेकिन बजट नहीं मिला। सरकार से पुन: आग्रह किया जाएगा।
-डॉ. महेश शर्मा, विभागाध्यक्ष, पंचकर्म विभाग, राजस्थान आयुर्वेद चिकित्सालय, करवड़ (जोधपुर)