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Lok Devta Baba Ramdev :जानिए कहां तैयार हो रही है , लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ की भव्य प्रतिमा

भक्तों को आशीर्वाद देते नजर आएंगे बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ छीतर पत्थर से विशाल प्रतिमा निर्माण कार्य अंतिम चरण में  
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Lok Devta Baba Ramdev :जानिए कहां तैयार हो रही है , लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ की भव्य प्रतिमा

Lok Devta Baba Ramdev :जानिए कहां तैयार हो रही है , लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ की भव्य प्रतिमा

जोधपुर. मसूरिया पहाड़ी की गोद में स्थिति बाबा रामदेव मंदिर विकास कार्य में एक और नया आयाम जुड़ने जा रहा है। जल्द ही लोकदेवता बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ समाधि मंदिर परिसर में गुरुबालीनाथ की छीतर से निर्मित विशाल प्रतिमा भक्तों को आशीर्वाद देते नजर आएगी। ओडिसा के कलाकार सामरेन्द्र महापात्र बालीनाथ की मूर्ति को अंतिम रूप प्रदान करने में जुटे है।

स्थापत्य कला की दृष्टि से सम्मिश्रण कला का प्रतीक

मसूरिया रामदेव मंदिर में समय - समय पर अनेक परिवर्तन हुए जो वर्तमान समय तक अनवरत जारी हैं । मंदिर स्थापत्य कला की दृष्टि से सम्मिश्रण कला का प्रतीक है । ऐसी लोक मान्यता है कि जैसलमेर जिले में स्थित रामदेवरा में दर्शन से पूर्व मसूरिया स्थित बाबा रामदेव के गुरु की समाधि पर शीश नवाने से भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। लोक देवता बाबा रामदेव में देवत्व उजागर करने वाले उनके गुरु बालीनाथ के तप से आलोकित गुफा व 'धूणे' तक पहुंचने के लिए सुगम मार्ग का निर्माण किया गया है।

गुरु बालीनाथ ने इसीलिए यहां स्थापित किया धूना

पुरानी मान्यताओं की मानें तो लोक देवता बाबा रामदेव के गुरु का प्रारंभिक जीवन काल जैसलमेर जिले के पोकरण में बीता था। लोक देवता बाबा रामदेव की बहन सुगणा के विवाह में पोकरण भेंट किया गया था। सुगणा का पुत्र चंचल व शरारती था। उसने बाबा रामदेव के गुरू बालीनाथ के धूणे में मरा हुआ वन्यजीव डाल दिया जिससे वे नाराज हो गए। इसके बाद बालीनाथ ने जोधपुर कूच कर मसूरिया में धूणा स्थापित किया। बाबा रामदेव ने जोधपुर पहुंचकर उनसे कई बार क्षमा मांगी लेकिन बालीनाथ नहीं माने और मसूरिया में ही धूणा स्थापित किया।

स्वर्णिम आभा से सुसज्जित होगा मंच

बाबा रामदेव के गुरु बालीनाथ की मूर्ति स्थापित करने के लिए मंदिर गर्भगृह परिसर में ही आगरा के कारीगरों की ओर से आठ गुणा आठ आकार का कलात्मक मंच निर्मित हो चुका है। छीतर पत्थर से गुरु बालीनाथ की करीब 5 फीट विशाल मूर्ति व आसन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। स्वर्णिम आभा के बीच मूर्ति को विधिवत धार्मिक अनुष्ठानों के बाद स्थापित किया जाएगा।

पुरुषोत्तम राखेचा, कोषाध्यक्ष, मसूरिया मंदिर प्रबंधक ट्रस्ट