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नन्हीं अनुष्का की नब्ज तक नहीं टटोली पत्थर के ‘भगवान’ ने, पिता की गोद से छीनकर ले गई मौत

डॉक्टरों की लापरवाही, सांप के जहर से बेहाल ढाई साल की बच्ची की थमी सांसे

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नन्हीं अनुष्का की नब्ज तक नहीं टटोली पत्थर के 'भगवान' ने, पिता की गोद से छीनकर ले गई मौत

नन्हीं अनुष्का की नब्ज तक नहीं टटोली पत्थर के 'भगवान' ने, पिता की गोद से छीनकर ले गई मौत

जोधपुर . ओपीडी में बैठे चिकित्सकों ने सर्पदंश का शिकार बच्ची को गंभीरता से नहीं लिया। उसकी नब्ज तक नहीं टटोली। परिजनों और आयुर्वेद अस्पताल से साथ आए कर्मचारी का कहना हैं कि उसे गांधी अपताल ओपीडी तक लेकर आए तो वह पलक झपका रही थी। वहीं पर प्राथमिक उपचार कर दिया होता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी।

मशक्कत के बाद पहुंचे अस्पताल, डॉक्टर अस्पताल दर अस्पताल घुमाते रहे
कंपकंपाते हाथों से बच्ची को गोद मे उठाकर उसके चाचा इधर-उधर भटकते हुए जैसे-तैसे गांधी अस्पताल में घुसे। अंदर जाकर पहले गांधी प्रतिमा के पास से ओपीडी की ओर गए। उसी तेजी से वापस बाहर भी आ गए, क्योंकि अंदर बैठे चिकित्सकों ने उन्हें मथुरादास माथुर अस्पताल जाने की सलाह दी। कुछ लोगों ने उम्मेद ले जाने को कहा। डॉक्टरों से तो ऑटो चालक भलाघबराए चाचा उल्टे पांव जैसे ही भतीजी को हाथ में लेकर आए तो बाहर धरने पर बैठे सफाईकर्मियों ने सोचा कि ओपीडी का रास्ता ढूंढ रहे हैं, उन्हें सेंट्रल लैब से अंदर जाने को कहा। अंदर गए भी, लेकिन वापस बाहर आकर अस्पताल परिसर में ही बदहवास हो इधर-उधर चक्कर काटने लगे। इस बीच, मरीज छोड़कर लौट रहा ऑटो चालक उन्हें लेकर मथुरादास माथुर अस्पताल गया।


गौरतलब हैं कि गुरुवार को सर्पदंश का शिकार हुई ढाई साल की बच्ची को महात्मा गांधी अस्पताल में लाए जाने के बाद भी बच्ची का बचाया नहीं जा सका। नन्हीं अनुष्का का जीवन डॉक्टरों की अनदेखी की भेंट चढ़ गया। यहां उसे समय पर इलाज नहीं मिला। सिसकियां भरते हुए पिता पप्पूराम चौधरी अपने कंधे पर उठाकर बच्ची का शव ले गए। कड़वड़ क्षेत्र के टपूकड़ा गांव में सुबह करीब 10.30 बजे ढाई साल की अनुष्का को सांप ने काट लिया। परिजन इलाज के लिए बच्ची को आयुर्वेद अस्पताल ले गए। जहां पर उसे प्राथमिक उपचार नहीं मिला। परिजन वहीं के एक कर्मचारी की गाड़ी में अनुष्का को भदवासिया स्थित निजी अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार देने के बजाय महात्मा गांधी अस्पताल रवाना कर दिया। बच्ची के चाचा उसे गोद में लेकर गांधी अस्पताल पहुंचे, यहां से भी मथुरादास माथुर अस्पताल की जनाना विंग में इलाज का हवाला देकर बिना प्राथमिक उपचार के ही चलता कर दिया। वहां पहुंचते ही बच्ची को आईसीयू में भर्ती करने के कुछ देर बाद मृत घोषित कर दिया गया। आए दिन चिकित्सकों की लापरवाही के चलते यहां के लोगों में रोष पनपने लगा है।